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एनएसजी पर मोदी के साथ आई ट्रंप सरकार

By Raj Express | Publish Date: 3/16/2017 10:55:57 AM
एनएसजी पर मोदी के साथ आई ट्रंप सरकार

वाशिंगटन। अमेरिका ने बुधवार को कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के प्रवेश की कोशिशों को बल देने के लिए वह उसके और एनएसजी के सदस्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन के अंतर्गत भी इस मुद्दे पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिका चार बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत की पूर्ण सदस्यता का समर्थन करता है और हमारा मानना है कि भारत एनएसजी की सदस्यता के लिए तैयार है।’48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता की कोशिशों को लेकर ट्रंप प्रशासन के रुख से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। बुश प्रशासन के समय से ही भारत और अमेरिका इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। ओबामा प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद चीन के विरोध के कारण यह कार्य नहीं हो सका। विदेश विभाग के अधिकारी ने कहाकि सदस्यता प्राप्त करने के भारत के प्रयासों को मजबूती देने के लिए हमने भारतीय समकक्षों और एनएसजी से जुड़े देशों की सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2005 में 150 मिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा कमाया और 38 मिलियन डॉलर इनकम टैक्स भरा। यह सूचना व्हाइट हाउस ने दी, क्योंकि यूएस टीवी होस्ट रेचल मैडो ने यह कहा था  कि उनके पास ट्रम्प के 2005 के टैक्स फॉर्मस हैं ट्रम्प की टैक्स और कमाई से जुड़ी सूचनाओं को बड़ा दस्तावेज माना जा रहा है, क्योंकि चुनावी अभियान में ट्रम्प ने  कमाई की कोई भी सूचना जनता के सामने लाने से मना कर दिया था। यह कहते हुए ट्रम्प ने उस परंपरा की भी धज्जियां उड़ा दीं जिसके तहत सभी पूर्व राष्ट्रपति कमाई और टैक्स की जानकारी जनता को देते थे। ट्रम्प ने यह कहकर कोई भी सूचना देने से इनकार कर दिया था कि यूएस में इंटरनल रेवेन्यू सर्विस का उनपर ऑडिट चल रहा है और अटॉर्नी की ओर से आदेश है कि वे अपनी कमाई जाहिर न करें। क्या है एनएसजी एनएसजी 48 देशों का एक समूह है, जो आम राय के सिद्धांत पर काम करता है, जिसका चीन भी एक सदस्य है। एनएसजी परमाणु हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामग्री, उपकरण और तकनीक के निर्यात का नियंत्रण करता है। भारत इस प्रतिष्ठित समूह में शामिल हो इसके लिए जरूरी है कि सभी 48 देशों के बीच आम सहमति बने। चीन भारत की सदस्यता का लगातार विरोध करता आ रहा है।  वह चाहता है कि भारत के साथ पाक को भी इस समूह में शामिल किया जाए। चीन का कहना है कि भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए इस पर अभी सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। चीन का कहना है कि यदि गैर-एनपीटी देश को सदस्य बनाने की ऐसी कोई व्यवस्था बनती है तो उसमें भारत के साथ पाक को भी जगह मिलनी चाहिए। जबकि भारत का तर्क है कि फ्रांस ने भी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं फिर भी वह एनएसजी का सदस्य है। एनएसजी सदस्यता मिलने पर बढ़ेगा भारत का कद: भारत को एनएसजी में प्रवेश मिलने के कई फायदे हैं। एक बार प्रवेश मिल जाने पर भारत की तरक्की की राह पर और तेजी के साथ आगे बढ़ेगा। इस समूह का हिस्सा बन जाने पर परमाणु हथियार से जुड़ी सामग्रियां, उपकरण एवं तकनीक भारत को आसानी से उपलब्ध होने लगेगी। भारत रक्षा एवं मिसाइल उपकरण अन्य देशों को बेचने के साथ ही परमाणु हथियारों पर बनने वाली नीतियों पर अपनी राय रख सकेगा।   

 
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