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बिज़नेस

टाटा और डोकोमो ग्रुप के बीच सुलह की दास्ताँ

By Raj Express | Publish Date: 3/6/2017 6:12:58 PM
टाटा और डोकोमो ग्रुप के बीच सुलह की दास्ताँ
मुंबई। सिंगापुर का मंदारिन ओरिएंटल वेन्यू के लिए पहली चॉइस नहीं थी। हालांकि, मेन लॉबी में कंस्ट्रक्शन वर्क के चलते ऑर्चर्ड रोड पर शांगरी ला होटल का ऑप्शन खत्म हो गया था। रतन टाटा और उनके करीबी इशात हुसैन जानते थे कि इस मीटिंग में न सिर्फ टाटा ग्रुप का बहुत कुछ दांव पर लगा है, बल्कि इससे भारत और जापान के रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं। टाटा संस के अंतरिम चेयरमैन के तौर पर रतन टाटा के पास कुछ ही हफ्ते बचे थे। 3 फरवरी की सुबह जब वह होटल के लेवल 5 स्थित हार्बर व्यू सुइट में आये तो उनका स्वागत एनटीटी डोकोमो के सीईओ और प्रेजिडेंट काजुहिरो योशिजावा और उनकी सीनियर लीडरशिप टीम ने किया। रतन टाटा जापानी कंपनी के साथ दो साल से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए पूरा जोर लगाने का इरादा करके गए थे। यह विवाद एनटीटी डोकोमो के टाटा टेलिसर्विसेज के साथ जॉइंट वेंचर को लेकर चल रहा था। इससे पहले दिल्ली, तोक्यो, सिंगापुर और मुंबई में दोनों कंपनियों के बीच टॉप लेवल पर कई बैठकें हो चुकी थीं। इसी वजह से दिल्ली हाईकोर्ट में टाटा ग्रुप ने जापानी कंपनी को 1.17 अरब डॉलर देकर विवाद खत्म करने का फैसला किया। इस दोनों कंपनियों के दर्जनों एग्जिक्युटिव्स से बात करने एवं नाम न बताने की शर्त पर जानकारी मिली । 3 फरवरी की मीटिंग में योशिजावा खुद आए थे। इसने रतन टाटा का मन छू लिया। सितंबर 2016 से ही योशिजावा के लेटर उन तक पहुंचने लगे थे और दोनों के बीच फोन पर भी बात हो रही थी। एनटीटी डोकोमो के साथ रिश्ते खराब करने को लेकर रतन टाटा पहले ही नाराजगी का इजहार कर चुके थे। 2009 में एनटीटी डोकोमो ने टाटा टेली में 12,740 करोड़ में 26.5 प्रतिशत स्टेक खरीदा था। तब दोनों के बीच सहमति बनी थी कि अगर टाटा टेली कुछ शर्तों को पूरा नहीं कर पाती है तो टाटा इस वेंचर से डोकोमो को निकलने का रास्ता देगा। इसके तहत वह इन्वेस्टमेंट वैल्यू की आधी कीमत चुकाएगा या डोकोमो के हिस्से के लिए ऊंची कीमत पर खरीदार तलाशेगा। टाटा ग्रुप शर्तें पूरी नहीं कर पाया और जापानी कंपनी ने वेंचर से निकलना चाहा। हालांकि, मई 2013 में टाटा टेली की इक्विटी वैल्यू इन्वेस्टमेंट वैल्यू के मुकाबले आधी से कम हो गई थी। इसके बाद डोकोमो ने आर्बिट्रेशन का केस दर्ज कराया, जिसमें जून 2016 में टाटा ग्रुप को उसे 1.2 अरब डॉलर यानी 7,250 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा गया। हालांकि, सायरस मिस्त्री के कमान में टाटा ग्रुप ने यह दावा किया कि देश की नीतियों के मुताबिक वह डोकोमो की तरफ से मांगी जा रही रकम नहीं चुका सकता। सितंबर में अपने पहले लेटर से ही टाटा जापानी कंपनी के साथ किया गया वादा निभाने को लेकर मुखर थे। उन्होंने कहा था कि दोनों कंपनियों के कानून के तहत जो वादा किया गया था, उसे निभाया जाना चाहिए। टाटा के प्रवक्ता ने बताया, 'हम 28 फरवरी को ही कह चुके हैं कि यह सेटलमेंट भारत के हित में हैं और इससे देश में निवेश को लेकर भरोसा बना रहेगा। साथ ही, टाटा ग्रुप ने आज तक जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया है। यह उसके मुताबिक भी है।' मिस्त्री के जाने के बाद टाटा ने लंदन आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपना विरोध वापस ले लिया। वहीं, एनटीटी डोकोमो ने कहा कि सेटलमेंट एग्रीमेंट इस विवाद को सुलझाने की राह में बड़ा कदम है।
 
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