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वेतन निर्धारण में महिलाओं के साथ भेदभाव बरकरार: सर्वेक्षण

By Raj Express | Publish Date: 3/6/2017 6:54:02 PM
वेतन निर्धारण में महिलाओं के साथ भेदभाव बरकरार: सर्वेक्षण
नई दिल्ली। समानता का अधिकार देने एवं कार्यस्थल पर भेदभाव नहीं होने देने की सरकार की कोशिश के बावजूद देश में पुरूषों की तुलना में महिला कर्मचारियों को औसतन 25 फीसदी कम वेतन दिया जाता है और वेतन निर्धारण में अब भी लिंग भेद का बोलबाला है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर ऑनलाइन नौकरी एवं नियुक्ति समाधान प्रदाता कंपनी मॉन्स्टर इंडिया द्वारा आज यहां जारी लिंग आधारित मॉन्स्टर वेतन सूचकांक में यह दावा किया गया है। इसके जरिये वुमन ऑफ इंडिया इंक सर्वेक्षण के निष्कर्षों का खुलासा किया गया है, जिसमें दो हजार से अधिक कामकाजी महिलाओं ने भाग लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन में लिंग आधारित अंतर अभी बरकरार है। वर्ष 2016 के इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि अभी भारत में वेतन में लिंग आधारित अंतर 25 फीसदी है। वर्ष 2016 में देश में पुरुषों की औसत प्रतिघंटा कुल कमाई 345.80 रुपये थी, वहीं महिलाओं की कमाई महज 259.80 रुपये थी। यह अंतर 2015 के 27.2 प्रतिशत से दो प्रतिशत कम है लेकिन वर्ष 2014 के 24.1 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि इसके बावजूद 53.9 प्रतिशत महिलाएँ संतुष्ट से लेकर आंशिक तौर पर संतुष्ट दिखीं हैं तथा उनका मानना है कि उनके लिए और ज्यादा अवसर होने चाहिए। ज्यादा समावेशी वातावरण तैयार करने के लिए समान वेतन और नये प्रस्तावों पर चर्चाओं के बावजूद 62.4 प्रतिशत महिलाओं का सोचना है कि उनके समकक्ष पुरुषों को पदोन्नति के ज्यादा अवसर उपलब्ध हैं और पदोन्नति का निर्णय करने में अन्य मानदंडों के साथ साथ लिंग को भी तरजीह दिया जाता है। 
इसमें कहा गया है कि विनिर्माण उद्योग में पुरूष एवं महिलाओं के वेतन में 29.9 प्रतिशत का अंतर पाया गया है। इसमें 2015 की तुलना में 5 प्रतिशत का सुधार हुआ है। इसके बाद आईटी उद्योग में भी यह अंतर 25.8 प्रतिशत रहा है। बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) उद्योग में वेतन का लैंगिक अंतर 21.5 फीसदी पायी गयी है। शिक्षा एवं अनुसंधान उद्योग में औसत लिंग-आधारित वेतन अंतर 14.7 प्रतिशत है। 
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