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बिज़नेस

चीन ले रहा है दिलचस्पी भारतीय हैंडीक्राफ्ट में

By Raj Express | Publish Date: 3/8/2017 12:58:36 PM
चीन  ले रहा है दिलचस्पी भारतीय हैंडीक्राफ्ट  में

नई दिल्ली। भारत बड़े पैमाने पर अपने हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। श्रम की लागत काफी ज्यादा रहने से यहां स्थानीय उत्पादकों के लिए मांग पूरी करने में मुश्किल हो रही है। हस्तशिल्प निर्यात वित्त वर्ष 2015 के 308 करोड़ रुपये के दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर इस साल 650 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। चीन से मेटल आधारित क्राफ्ट और ब्लॉक प्रिंटेड आइटम्स की मांग ज्यादा है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर राकेश कुमार ने बताया, 'चीन हमारे हैंडीक्राफ्ट में काफी दिलचस्पी ले रहा है क्योंकि वहां इस कला पर ज्यादा जोर नहीं दिख रहा है और इसके साथ ही उसे ऊंची लेबर कॉस्ट का भी सामना करना पड़ रहा है।' चीन के साथ भारत के बढ़ते ट्रेड डेफिसिट के बीच यह स्थिति भारत के लिए उम्मीद की किरण है। वित्त वर्ष 205-16 में भारत का चीन को एक्सपोर्ट 9 अरब डॉलर रहा, जबकि इंपोर्ट 61.7 अरब डॉलर रहा। यानी 52.7 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट रहा। कुमार ने बताया कि हाल के आईएचजीएफ में 90 चाइनीज खरीदारों ने 200 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए थे। आईएचजीएफ हैंडीक्राफ्ट और गिफ्ट के मामले में एशिया का सबसे बड़ा मेला है। इंडियन हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में अमेरिका और यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी तकरीबन 65 फीसदी है। इजराइल, कोलंबिया, उरुग्वे और चिली ने भी भारत में हाथ से बने आइटम्स को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। भारत के लिए नया मार्केट तलाशना जरूरी हो गया है, क्योंकि उसे स्थापित बाजारों में पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है। भारत को वूडन हैंडीक्राफ्ट के मामले में मलेशिया और वियतनाम से मुकाबला करना पड़ रहा है।

 
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