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बिज़नेस

दलहन आयात पर शुल्क लगाने का विचार कर रही सरकार

By Raj Express | Publish Date: 3/12/2017 10:17:42 AM
दलहन आयात पर शुल्क लगाने का विचार कर रही सरकार
नई दिल्ली। किसानों को अपनी दलहन उपज के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य जितने भी नहीं मिल रहे हैं, लेकिन आयात पूरे जोर-शोर से हो रहा है। शीर्ष मंत्रियों की बैठक में एक सुझाव रखा गया कि दलहन पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए, ताकि घरेलू स्तर पर उत्पादित दलहनों की किसानों को अच्छी कीमत मिले। अगर किसानों को अपनी दलहन उपज की अच्छी कीमत नहीं मिली तो इसका अगले खरीफ  सीजन में बुआई पर असर पड़ेगा।
इस वजह से कृषि मंत्रलय दालों पर आयात शुल्क लगाने के बारे में विचार कर रहा है। हालांकि पिछले एक दशक से दलहनों का बिना किसी शुल्क के आयात हो रहा है। हाल में केंद्र सरकार के शीर्ष मंत्रियों की बैठक हुई थी। यह बैठक आयातित दालों के लिए फ्यूमिगेशन नियमों में ढील देने से संबंधित मसलों पर चर्चा को लेकर हुई थी। इसी बैठक में दालों के सस्ते आयात का मसला भी उठा। देश में इस साल जनवरी से अब तक दलहन का कुल आयात 7 से 8 लाख टन अनुमानित है। जनवरी में चने का थोड़ा आयात हुआ था। उस समय घरेलू फसल की आवक शुरू नहीं हुई थी। अब घरेलू आवक तेज हो गई है, जिससे आयातक नए अनुबंध नहीं कर रहे हैं। 
भंडारण की पर्याप्त जगह नहीं
रोचक बात यह है कि सरकार के पास दालों के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इसके नतीजतन निजी कारोबारी दालों का स्टॉक रहे हैं, ताकि वे कम आपूर्ति के समय इनकी बिक्री कर सकें। कोठारी ने कहा कि दालों की एक दिन में खपत नहीं होती है, इसलिए उन्हें आगे के लिए भंडारित कर रखा जाता है। इसे मद्देनजर रखते हुए सरकार को स्टॉकिस्टों पर दालों की स्टॉक की सीमा हटानी चाहिए।
दलहन के भाव एमएसपी से नीचे
खरीफ  सीजन में उत्पादित ज्यादातर दलहनों की कीमतें देशभर की बहुत सी मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी से नीचे हैं। इंडियन पल्सेज ऐंड ग्रेन्स एसोसिएशन ने कहा, सरकार को आयात शुल्क लगाकर आपूर्ति नियंत्रित करने के लुघ अवधि के उपायों पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए। दालों के दाम 45 से 60 रुपए प्रति किलोग्राम हैं। इसलिए सभी दालों पर आयात शुल्क लगाने से भारत में दालों की खपत पर असर पड़ेगा। कोठारी ने कहा कि इस समय देश में अरहर, मूंग और मसूर की आपूर्ति भरपूर है, इसलिए सरकार को इनके निर्यात की मंजूरी देनी चाहिए ताकि किसानों को बेहतर कीमत मिल सके। इस समय इनकी कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे चल रही हैं। भारत में उड़द की अच्छी पैदावार नहीं होती है, जिससे उड़द के दाम हाल के निचले स्तरों से ऊपर उठे हैं।  
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