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राज्य

लाखों रुपयों की नेत्र ओटी चलाने वाला लेकिन कोई नहीं...

By Raj Express | Publish Date: 2/27/2017 2:12:17 PM
लाखों रुपयों की नेत्र ओटी चलाने वाला लेकिन कोई नहीं...

डबरा। एक ओर मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार क ल्याण मंत्रलय सिविल अस्पतालों में करोडों रुपयों की लागत से अच्छे भवन और ऑपरेशन थियेटर और सुविधाएं देने की बात करता है। मगर दूसरी ओर जब ऐसी सुविधाओं वाले अस्पतालों में विशेषज्ञ बीमारी के डॉक्टर ही नहीं होंगे,तो गंभीर बीमारियों का इलाज कैसे हो पाएगा। यह दर्द डबरा अंचल के उन मरीजों में देखने को मिलता है जो हड्डी व नेत्र से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए सिविल अस्पताल तो आते हैं। मगर दोनों ही बीमारी के डॉक्टर न होने की स्थिति में मायूस होकर लौट जाते हैं। सिविल अस्पताल में नेत्र सहायक राज अग्रवाल ही आंखों के मरीजों को वह सुविधा दे रहे हैं जो कि विशेषज्ञ डॉक्टर को देनी चाहिए। दरअसल,सिविल अस्पताल डबरा में सन 2008 में डॉक्टर रामेश्वर गुप्ता हड्डी रोग विशेषज्ञ हुआ करते थे। लेकिन जब से डॉ.रामेश्वर गुप्ता ने बीआरएस लिया तभी से यह पद सिविल अस्पताल में आज भी खाली है। 9वर्षो में हड्डी विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती आज तक मप्र शासन के लोक स्वास्थ्य एवं रवार क ल्याण मंत्रलय नहीं कर पाया। 68 पंचायतें ब्लॉक के अंदर है तथा डबरा नगर की जनसंख्या 1 लाख 20 हजार से ऊपर है। यानि की लगभग 2 लाख की जनसंख्या सिविल अस्पताल पर आधारित है। जबकि इस अस्पताल में न तो नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और न ही हड्डी रोग विशेषज्ञ। कई बार आम जनता एवं समाज सेवियों ने डॉक्टरों की मांग कई बार मंत्रियों और अधिकारियों से डबरा आगमन के समय कही। लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। डबरा अंचल धूल के गुब्बारे के लिए प्रसिद्ध है तो ऐसी स्थिति में आंखों के मरीज भी ज्यादा निकलते होंगे। लेकिन आंखों के ये मरीज इलाज के लिए जाए भी तो कहां जब नगर में एक ही निजी चिकित्सालय है,जहां पर इलाज आंखों का हो सकता है। सिविल अस्पताल में जाए तो नेत्र सहायक ही चैक करते है। ऐसी स्थिति में जब कोई आंखों और हड्डीयों से संबंधित बीमारी का मरीज सिविल अस्पताल में आता है तो उसे मायूस होकर लौटना पड़ता है। 

दांतों का डॉक्टर नहीं
सिविल अस्पताल में दांतों के डॉक्टर अग्निहोत्री हुआ करते थे। लेकिन उनके स्वास्थ्य में खराबी आने के चलते अस्पताल में नहीं आते,ऐसी स्थिति में चार माह से सिविल अस्पताल में दातों को कोई डॉक्टर नहीं है जो दांतो के मरीजों का इलाज कर सके। दांतों के मरीज मजबूरन निजी चिकित्सकों पर आधारित है जहां हजारों रुपए इलाज पर खर्च करना पड़ता है । 
छह थानों की होती हैं एमएलसी
अनुभाग से छह:थानों में गिजौर्रा,पिछोर,बिलौआ,आंतरी,टेकनपुर,डबरा शहर,देहात थानों में जितने भी अपराध पंजीबद्ध होते हैं उन अपराधों में शामिल आरोपियों और फरियादियों की एमएलसी सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को ही करना होती है। लेकिन जब किसी अपराध में आंख और हड्डी से संबंधित बडी चोट होती है तो ऐसे फरियादियों को घायल अवस्था में ग्वालियर,मुरार,सिविल अस्पताल पर आधारित होना पड़ता है। जिसमें घायल व्यक्ति के हजारों रुपए खर्च हो जाते है और परेशानियां होती हैं। 
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