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राज्य

तुलसी स्पर्श से काव्य की रानी हुईं मानस चौपाई...

By Raj Express | Publish Date: 2/27/2017 2:36:51 PM
तुलसी स्पर्श से काव्य की रानी हुईं मानस चौपाई...

ग्वालियर। चौपाई की रचना मलिक मोहम्मद जायसी ने की थी। लेकिन गोस्वामी तुलसीदास के स्पर्श से रामचरित मानस की चौपाई काव्य की रानी हो गई। चार पद की चौपाई ही सत्य और दोहा प्रेम है। मोरारी बापू ने श्रीराम कथा के अंतिम दिन यह बात कही। इस मौके पर बापू से बिछुड़ने के वियोग में कथा पांडाल में पूरे समय अश्रुधारा बहती रही। कथा समापन के बाद बापू की एक झलक पाने सड़क के दोनों ओर दो मीटर तक भक्तों की कतार लग गई। बापू ने कहा कि आपका इष्ट कोई भी हो यदि आप इष्ट से प्रेम करते हो तो आपको महेश की आराधना भी करनी होगी। इष्ट को कोई तकलीफ न हो, इसलिए महेश को मनाना जरूरी है।

महादेव की पूजा से नहीं आते रोग
बापू ने कहा कि यदि आप रोग दोष से दूर रहना चाहते हैं,तो महादेव का सुमिरन करना होगा। महादेव का अर्चन करने वालों के परिवार में रोग और बीमारियां प्रवेश नहीं करती हैं। बापू से जो लोग पूछ रहे थे कि वे अब वापस ग्वालियर कथा करने कब आएंगे। इसके जबाव में बापू ने कहा कि जब में यहां से जाऊंगा तभी तो पुन: लौटकर आऊंगा। बापू ने कहा कि हमने जो लम्हें जिए हैं उनको ही पकड़ कर रखो।
अपनी काली दाढ़ी देखकर खुद डर जाता हूं: बापू बोले कि एक साधक ने कहा कि बापू 40 वर्ष पूर्व आपकी दाढ़ी काली थी और अब सफेद हो चुकी है, जो पहले से अच्छी लगती है। पहले तो आप काली दाढ़ी में डाकू लगते थे। बापू बोले कि सच तो यह है कि मैं अपनी पुरानी काली दाढ़ी की फोटो देखकर खुद डर जाता हूं।
15 मिनट में पूरी हुई रामकथा
अंतिम दिन चित्रकूट धाम में मोरारी बापू ने राम कथा का वर्णन राम विवाह जिसमें भगवान राम के वनवास से लेकर राजलितक का प्रसंग शामिल रहा। कथा के दौरान मोरारी बापू और भक्तों के आंखों में अश्रू धारा भी बहती रही। इस अवसर पर हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। 
शहर के समाचारपत्रों की सराहना
बापू ने अंतिम दिन कथा के प्रचार-प्रसार में जुटे पत्रकारों को साधुवाद देते हुए कहा कि मैं ग्वालियर की मीडिया से बहुत प्रसन्न हूं। मैंने कथा में बोला अखवारों ने बिल्कुल वही लिखा,ऐसा बहुत कम जगह देखने को मिलता है। सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों की भी उन्होंने तारीफ की।
अंतिम दिन सब हो गए वीआईपी
मीडिया गैलरी के एंट्री गेट पर पहले दिन से ही प्रवेश के लिए जद्दोजहद रही। अंतिम दिन आयोजन समिति के सदस्य राजीव चड्ढा ने जब 4 लोगों को उक्त गेट से एंट्री दी तो सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि आप ही व्यवस्था बिगाड़ेंगे तो हम कैसे व्यवस्था कर पाएंगे। इसके बावजूद उन्होंने जबरन 4 लोगों को प्रवेश दिला दिया। इसस नाराज सुरक्षाकर्मियों ने प्रवेश द्वार से मेटल डिटेक्टर हटा लिया और व्हीआईपी द्वार आम लोगो के लिए खोल दिया,जिससे अंतिम दिन आम जनता भी व्हीआईपी दीर्घा में बैठकर कथा का आनंद लेती दिखी।
चार्टर्ड प्लेन से बापू भोपाल रवाना
मोरारी बापू दोपहर को सीधे कथा स्थल से विमानतल के लिए रवाना हुए। उसके बाद दोपहर 2 बजे चार्टर्ड प्लेन से भोपाल के लिए रवाना हो गए। गौरतलब है कि बापू की कथा भोपाल में 28 फरवरी से शुरू हो रही है।
देवताओं की जगह नौकर को दे दो
कथा में मोरारी बापू ने कहा कि हमें बहुत देवता के झंझट में नहीं पड़ना चाहिए। वे बोले कि मैं लोगों के घरों पर जाता हूं तो वहां एक-एक कमरे में डेढ सौ-डेढ सौ देवता बैठे हुए हैं। मैं पूछता हूं कि इतने देवताओं को कैसे संभालते हो तो भक्त कहते हैं कि जो संत आता है वह हमें एक ना एक देवता पकड़ा जाता है। इसीलिए देवताओं की संख्या बढ़ गई हैं। बापू ने कहा कि मेरा मानना है कि आप किसी भी देवता को मानों। लेकिन देवताओं की जगह एक कमरा अपने नौकर को भी दे दो,जिससे वह सुख पूर्वक रह सके। बापू ने कहा कि हमें घर में काम करने वाले नौकर का भी ध्यान रखना चाहिए। 
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