• 14 साल की लड़की को बंधक बना 1000 लोगों से बनवाया शारीरिक संबंध
  • प्रशांत भूषण को पीटने वाले को बीजेपी ने बनाया प्रवक्ता
  • राजस्थान: लैंडिंग से पहले बाड़मेर में क्रैश हुआ सुखोई, दोनों पायलट सुरक्षित
  • 'लालू परिवार' हुआ रघुवंश से नाराज, राबड़ी ने बयान को बोला फूहड़
  • गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पांचवां प्रांत घोषित करने की तैयारी में पाकिस्तान
  • सिद्धू को मिल सकता है कांग्रेस से झटका, अमरिंदर नहीं चाहते कोई डिप्टी CM
  • लोकसभा में भाजपा सांसदों ने किया पीएम मोदी का स्वागत, लगे 'जयश्री राम' के नारे
  • पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी में फूट के आसार!

होम |

राज्य

बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने विधानसभा में दिए आंनदित रहने के टिप्स और कहा

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 12:46:46 PM
बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने विधानसभा में दिए आंनदित रहने के टिप्स और कहा
भोपाल। आध्यात्मिक धर्मगुरु और नोबल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा ने जाति व्यवस्था को सामाजिक बुराई कहते हुए इसे आउटडेटेड करार दिया है। इस सामाजिक बुराई से समाज का उद्धार नहीं हो सकता, इसे हटाने की जरूरत है। यह बुराई भारत सहित दुनिया के बाकी देशों में भी है। यह बात उन्होंने रविवार को विधानसभा सभागार में आनंदित रहने की कला विषय पर व्याख्यान में कही। उन्होंने हरियाणा में एक उच्च से निम्न और निम्न से उच्च जाति के बीच विवाह को लेकर हुए उपद्रव का जिक्र करते हुए इसे बेहद दुखद बताया। यह कुरीति बंद होना चाहिए। महात्मा बुद्ध भी जाति प्रथा के विरोधी थे। 
दवा की तरह एक धर्म भी सबके लिए कारगर नहीं: धर्म को लेकर आध्यात्मिक धर्मगुरु ने कहा कि जिस तरह एक दवा सबके लिए कारगर नहीं होती, उसी तरह एक धर्म भी सबके लिए कारगर नहीं है। मैं भिक्षु हूं, लेकिन यह नहीं कह सकता हूं कि बौद्ध धर्म सबसे श्रेष्ठ है। यह दवाई की तरह है, क्योंकि सबकी मानसिक स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि भारत में हजारों वष्रो से कई धर्म के लोग साथ रहते आए हैं, किसी तरह का कोई विवाद नहीं। उन्होंने कहा कि दंगा- फसाद पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। सुन्नी- शिया आपस में लड़ते हैं, एक ही परंपरा को मानने वाले आपस में लड़ते हैं। यह बंद होना चाहिए। मेरी अपील है कि सबको करूणा और मैत्री का संदेश दिखाइए। 
मां से सीखा करुणा-प्रेम
दलाई लामा ने कहा कि मेरी मां जैसी कृपालु महिला मैंने नहीं देखी। कभी भी चेहरे पर गुस्से की सिकन नहीं। लेकिन पिता गुस्से वाले थे। मैं उनकी मूंछे खींच देता था, तो वे गुस्सा होते थे। मां से कम प्यार करते थे। पहली गुरु मेरी मां ही है। करुणा- प्रेम मां से ही सीखी। 
कोई हंसता नहीं तो गुदगुदी करता हूं
आध्यात्मिक धर्मगुरु ने कहा कि जब मैं मिलता हूं तो भिखारी को भी उतना ही सम्मान देता हूं, अमीरों के लिए भी यही भाव होता है। सभी से प्रेम और दोस्ताना से मिलता हूं। कोई खुश नहीं, कोई हंसता नहीं, तो उसे गुदगुदी भी करता हूं। उन्होंने कहा कि मानव का मूल स्वभाव प्रेम और करूणा है, उसे और बढ़ाएं। उन्होंने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा कि वहां मेरे कई अमीर मित्र हैं, लेकिन वे केवल पैसे से खुश नहीं है। 
व्याख्यान छोड़कर चले गए मलैया
व्याख्यान में उस समय असहज स्थिति बन गई, जब दलाई लामा ने डायस पर उनके बाजू में बैठे वित्त मंत्री जयंत मलैया को यह कहकर टोक दिया कि आपको नींद आ रही है, आप चाहें तो जा सकते हैं। दलाई लामा के टोकने से लोगों की हंसी फूट पड़ी। ऐसे में मलैया ने अपने सामने रखे कागज को उठाया और डायस छोड़कर जाने लगे। तभी दलाई लामा ने उन्हें वापस बुलाया और पानी की बोतल भी पकड़ा दी कि यह भी लेते जाएं। यह घटना दोपहर ठीक 3.45 बजे घटी। मलैया जाने के बाद फिर वापस नहीं आए। मलैया मंच पर सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।  
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने होटल जहांनुमा में दलाई लामा से मुलाकात की। इस दौरान बौद्ध धर्मगुरु ने उन्हें महात्मा बुद्व की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद दिया।
 
 
Contact us: contact@rajexpress.com
Copyright © 2016 RajExpress.com. All Rights Reserved.
Designed by : 4C Plus