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राज्य

फीस घटाई फिर भी नहीं आए ठेकेदार आगे

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 1:13:18 PM
ग्वालियर। आबकारी विभाग ने ठेकेदारों की मोनोपॉली को तोड़ने छोटे ग्रुप भी बना दिए थे, लेकिन इसके बाद भी तीन चरणों के बाद सभी शराब दुकानों के ठेके नहीं हो सके है। तीन चरण की ई-टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, लेकिन इसके बाद 1427 करोड़ के ठेके नहीं हो सके हैं। ठेकों को देने अब विभाग ने जिला स्तर पर ही अधिकार देकर यह निर्देश जारी कर दिए हैं कि अगर रेट अधिक नहीं मिल रही तो पिछली साल की रेट पर ही ठेके आवंटित क र दिए जाएं। शेष शराब दुकानों का ठेका देने अब 22 मार्च को पुन: ई-टेंडर बुलाए हैं।
प्रदेश में जिस तरह से हर साल शराब दुकानों की फीस बढ़ाई जा रही है, उसके कारण विभाग को शराब दुकानों के ठेके देने में काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। हालत यह है कि पुराने ठेकेदारो ने सिंडिकेट बना लिया है, जिसके कारण वह आगे आकर बढ़ी हुई दर पर ठेके लेने से बच रहे हैं और रेट कम होने का इंतजार करते हैं। पिछले साल सिंडिकेट का दबाव काम आ गया था। लेकिन इस बार सिंडेकेट की काट के लिए शुरुआत में विभाग ने छोटे ग्रुप बना दिए थे। छोटे ग्रुप बनाने के पीछे  विभाग का उद्देश्य था कि इससे छोटे कारोबारी दुकान लेने के लिए आ सकते हैं। शुरुआती चरण में विभाग को फायदा भी हुआ और बढ़ी हुई दर पर काफी दुकानें आवंटित हो गई थीं।
..तो विभाग को ही चलानी पडेंगी दुकानें
वित्तीय साल समाप्त होने को है। ऐसे में आबकारी विभाग को 31 मार्च तक हर हाल में शराब दुकानें ठेके पर देने की प्रक्रिया पूरी करनी है। अगर 31 मार्च तक शराब दुकानें लेने कोई नहीं आया तो उक्त दुकानें विभाग को ही चलानी पड़ सकती हैं। फिलहाल करीब 1427 करोड़ रुपए की दुकानों के ठेके होना है। शुरुआती चरण में तो बाहर से आए ठेकेदारों ने काफी संख्या में दुकाने ले ली थीं, जिसके कारण आबकारी विभाग के अधिकारियों के चेहरे पर खुशी की लहर छा गई थी, क्योंकि उनको यह लगने लगा था कि इस बार आसानी से बढ़ी हुई दर पर शराब दुकानों के  ठेके हो सकेंगे। लेकिन उनकी यह मंशा आखिरी समय में फेल होते दिख रही है।
पिछले साल की रेट 
पर देने की तैयारी
वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में आबाकरी विभाग ने अपनी रणनीति बदली है। विभाग का सोचना यह है कि अगर 22 मार्च को टेंडर में शराब दुकानों के ठेके नहीं हुए तो फिर पिछले साल की दर पर ही दुकानें आवंटित कर दी जाएं। वैसे पुराने ठेकेदार इस बात को लेकर दबाव बना रहे हैं कि किसी भी तरह से दुकानों की दर कम हो जाएं। लेकिन विभाग ऐसे सिंडिकेट से जुड़े ठेकेदारों को पटकनी देने नए लोगों को कम रेट पर शराब दुकानें देना चाहता है। अब 22 मार्च को टेंडर के बाद ही पता चलेगा कि 1427 करोड़ के ठेके में से कितनी राशि के ठेके होंगे।
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