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लेख

अध्यात्म से होता है व्यक्तित्व का विकास

By Raj Express | Publish Date: 3/9/2017 5:19:43 PM
अध्यात्म से होता है व्यक्तित्व का विकास

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब एक छोटा बच्चा कमरे में प्रवेश करता है, तो कमरे में उपस्थित सभी व्यक्ति उस बच्चे की उपस्थिति मात्र से ही आकर्षित हो जाते हैं। बच्चा कोई प्रयास नहीं करता है, सब स्वत ही होता है। हम शब्दों से ज्यादा अपनी उपस्थिति से संवाद करते हैं। लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, अपने जीवन के इस उत्कृष्ट पक्ष (उपस्थिति) का ध्यान रखना भूल जाते हैं। हम किस तरह अपने जीवन में बालसुलभ ताज़गी, मित्रता और स्वाभाविकता पुन: प्राप्त करें? यह सुदर्शन क्रिया जैसी सहज परन्तु शक्तिशाली तकनीक द्वारा संभव है। यह तकनीक हमारे अस्तित्व की विभिन्न परतों कों स्वच्छ कर देती है। साथ ही शरीर से लेकर आत्मा तक की सूक्ष्म परतों को तनाव और भूतकाल के अनुभवों से बाहर निकाल कर हमारे आकर्षण और उपस्थिति के प्रभाव को पुन: स्थापित करती है।

आप कितने शीघ्र सरल होना चाहते है?

प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सरल होना चाहता है। लेकिन क्या सफलता बस बड़ा बैंक बैलेंस और विलासमय जीवन पाना है? कोई बहुत धन पा सकता है, लेकिन अगर शरीर अस्वस्थ हुआ तो, आप उसका उपभोग नहीं कर सकते। कई बार लोग धन प्राप्त करने के लिए हम अपना स्वास्थ्य खो देते हैं और फिर उस स्वास्थ्य को पाने के लिए अपना धन खर्च कर देते हैं। क्या यही वास्तविक सरलता है? उस अवस्था के बारे में सोचिए जब आपकी समस्या, समस्या न रहे। आप में उन्हें मुस्कराते हुए सामना करने की शक्ति हो और आप उन्हे सुअवसरों में परिवर्तित कर पायें। क्या आपको नहीं लगता यह सरल होने का चिन्ह है? आर्ट ऑफ लिविंग की तकनीके आपको इसी स्थिति तक पहुँचाती हैं। जीवन में योग, प्राणायाम और ध्यान से जितनी जल्दी आत्मबोध करते हैं, उतनी ही जल्दी जीवन के सभी पक्षों में आप अपनी सफलता को अनुभव करते हैं।

ऐसा व्यक्तित्व पायें जो अडिग रहे

ज्ञान और सेल्फ़-हेल्प की पुस्तकें सरलता से सभी जगह मिलती हैं। लेकिन ये पुस्तकें यह समझा नहीं पाती कि - मनमोहक व्यक्तित्व, चाल-ढाल, एक मित्रवत और हृदयस्पर्शी वातावरण व्यक्ति के प्रभामंडल में रहता है। प्राणायाम और ध्यान की प्राचीन पद्धतियाँ, जो आर्ट ऑफ लिविंग शिविर में सिखाई जाती हैं, वह उत्साह, अंत:प्रज्ञा, रचनात्मकता और बुद्धि को बढ़ाकर इस प्रभामंडल का विकास करती हैं और व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाती हैं। एक अविचल मुस्कराहट के साथ आप जीवन में जो भी चाहते हैं, उसे पाने का विश्वास और योग्यता आपको मिल जाती है। यह आपके आस पास के लोगों पर ऐसा प्रभाव डालता है जिससे लोग आपको एक प्रेरणा स्रोत की तरह देखने लगते हैं।

सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर एक मानवीय नेता, एक आध्यात्मिक गुरु और शांति के राजदूत है। उनकी दृष्टि एक तनाव मुक्त, हिंसा-मुक्त समाज ने लाखों लोगों को दुनिया पर सेवा परियोजनाओं और जीवन जीने की कला के पाठ्यक्रम के माध्यम से संयुक्त किया है। गुरुदेव को, कोलम्बिया, मंगोलिया और पराग्वे का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार सहित कई सम्मान दिए गये है। वह पद्म विभूषण के प्राप्तकर्ता है, भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार और दुनिया भर के पंद्रह मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किए गये है। गुरुदेव श्री श्री विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और गुणवत्ता नियंत्रण के भारत योग प्रमाणीकरण समिति के अध्यक्ष है। 500 वीं वर्षगांठ समारोह में कृष्ण देव राय के राज्याभिषेक में गुरुदेव स्वागत समिति के अध्यक्ष थे ।

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी का एक परिचय 

आध्यामिक धर्मगुरु श्री श्री रवि शंकर का जन्म 13 मई 1956 को तमिलनाडु में हुआ था। इनके पिता का नाम वेंकेट रतनम और माता का नाम विषलक्षी था। इनके पिता ने इनका नाम आदिगुरू शंकराचार्य के नाम पर शंकर रखा। बचपन से ही श्री श्री रवि शंकर का रूझान आध्यात्म की ओर हुआ। बचपन से ही श्री श्री ध्यान और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ करने लगे थे। सन 1982 में श्री श्री रवि शंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउण्डेशन की स्थापना की। जो शिक्षा और मानवता का व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य करती है और सन 1997 में इन्होने इंटरनेशनल एसोसियेशन फार ह्यूमन वैल्यू की स्थापना की।

 
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