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लेख

विज्ञान ने साबित कर दिया है कि हर चीज एक ही ऊर्जा है

By Raj Express | Publish Date: 3/10/2017 11:43:55 AM
विज्ञान ने साबित कर दिया है कि हर चीज एक ही ऊर्जा है
मॉडर्न फिजिक्स या आधुनिक भौतिक शास्त्र के अनुसार अस्तित्व में जो कुछ भी मौजूद है वह ऊर्जा ही है। तो फिर क्या कारण है कि सब कुछ एक होने के बाद भी दुनिया में मतभेद दिखाई देते हैं? क्या एक ऊर्जा दूसरी के खिलाफ है? क्या अच्छी और बुरी ऊर्जा जैसी कोई चीज़ है?आधुनिक विज्ञान ने साबित कर दिया है कि हर चीज एक ही ऊर्जा है। दुनिया भर के धर्म कहते रहे हैं कि ईश्वर हर जगह है। चाहे आप यह कहें कि ईश्वर हर जगह है, या आप यह कहें कि हर चीज एक ही ऊर्जा है ये दोनों ही बातें एक ही सच्चाई को बताती हैं।
सब कुछ एक ही ऊर्जा है
यह सृष्टि एक ऊर्जा है, जो खुद को लाखों तरीके से अभिव्यक्त कर रही है। जो पानी गिर रहा है, वह ऊर्जा है, वही ऊर्जा यहां एक पेड़ के रूप में खड़ी है। वही ऊर्जा आपके रूप में बैठी है। वही ऊर्जा मेरे रूप में यहां मौजूद है। वही ऊर्जा एक चट्टान के रूप में खड़ी है। आधुनिक विज्ञान ने साबित कर दिया है कि हर चीज एक ही ऊर्जा है। दुनिया भर के धर्म कहते रहे हैं कि ईश्वर हर जगह है। चाहे आप यह कहें कि ईश्वर हर जगह है, या आप यह कहें कि हर चीज एक ही ऊर्जा है - ये दोनों ही बातें एक ही सच्चाई को बताती हैं। एक ही बात को दो अलग-अलग तरीकों से कह दिया गया है। वैज्ञानिकों ने गणितीय आधार पर यह नतीजा निकाला है। धार्मिक लोग बस इस पर विश्वास करते रहे हैं, लेकिन दोनों के जीवन में यह अभी तक जीती जागती हकीकत नहीं है। इसी वजह से हमारे जीवन में रूपांतरण नहीं आता। ऊर्जा के गणित की खोज के बाद आइंस्टीन के जीवन में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आया। अब जब आप यह सवाल पूछते हैं कि क्या एक ऊर्जा दूसरी ऊर्जा पर हावी होती है, तो उसका जवाब है कि ऊर्जा तो एक ही है। यह दूसरी पर हावी कैसे हो सकती है? तो क्या इसका मतलब यह है कि लोग अलग-अलग तरह के नहीं हैं? अलग अलग तरह के लोग मौजूद हैं। अब अगर आप एक आदमी को एक उर्जा के रूप में और दूसरे आदमी को दूसरी उर्जा के रूप में लेते हैं, तो आप पूछ सकते है कि क्या यह ऊर्जा उस ऊर्जा पर हावी हो सकती है? यह इंसान उस इंसान पर हावी हो सकता है, शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से, भावनात्मक रूप से और उर्जा के स्तर पर भी। लेकिन यह ऊर्जा के खिलाफ ऊर्जा नहीं है। यह एक इंसान है जो कि दूसरे इंसान के खिलाफ है। वह अपनी ऊर्जा का प्रयोग किसी पर हावी होने के लिए कर रहा है।जैसे पहाड़ों से जब पानी गिरता है तो वह चट्टानों को तोड़ता है। एक तरह से पानी की ऊर्जा, पत्थर की ऊर्जा पर हावी हो रही है। इसी तरह से लोग भी अपनी ऊर्जा का एक खास तरह से उपयोग करके किसी दूसरे पर हावी हो सकते हैं।
 
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