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शिक्षा जगत

सांची विश्वविद्यालय में ग्रंथ संधानम कार्यशाला सम्पन्न

By Raj Express | Publish Date: 3/9/2017 7:53:39 PM
सांची विश्वविद्यालय में ग्रंथ संधानम कार्यशाला सम्पन्न

भोपाल। प्राचीन लिपियों, ग्रंथों और उस दौर में प्रचलित लिखने के तरीकों को समझने, पढ़ने के तरीकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अध्ययन पर आधारित ग्रंथ-संधानम कार्यशाला सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में सम्पन्न हो गई। पांडुलिपि शास्त्र और  लिपि शास्त्र में रुचि जागृत करने के उद्देश्य से 3 से 9 मार्च के दौरान आयोजित कार्याशाला का भरपूर लाभ छात्रों एवं शोधार्थियों ने लिया। कार्यशाला में भारतीय पांडुलिपि शास्त्र की विशेषता, लेखन एवं छपाई की तकनीकों, ब्राह्मी लिपि एवं अन्य लिपियों की जानकारी एवं पढ़ने की तकनीकों पर सात दिनों तक अध्ययन, अध्यापन एवं प्रदर्शन किया गया।
लिपि विज्ञान के प्रायोगिक अध्ययन के लिए कार्यशाला के प्रतिभागियों ने सांची स्तूप का भ्रमण कर स्तूप के स्तंभों पर लिखित भाषा को समझने का प्रयास किया। कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रो  बसु ने छात्रों को स्तूप के तोरण द्वार पर बने चित्रों का पढ़ने का तरीका समझाया। प्रो.  बसु ने अशोक कालीनए शुंग पाषाण तथा गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि के बारे में व्याख्यान लिए। वैदिक विद्वान डॉ सुद्युम्नाचार्य ने अक्षर विज्ञानए लिपि विज्ञान तथा भाषा विज्ञान की भारतीय परंपरा तथा पांडुलिपि संपदा के विषय में शोधार्थियों को बताया। शोधार्थियों ने पांडुलिपियों के प्रकार, पांडुलिपियों में त्रुटियां एवं लिपि विज्ञान की शोध प्रविधियों के बारे में सीखा।
- अनेक विश्वविद्यालयों के शोधार्थी हुए शामिल
इस कार्यशाला में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सम्मिलित हुए। कार्यशाला में आमन्त्रित विद्वानों में जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय उड़ीसा के धर्मशास्त्र एवं नीतिशास्त्र के प्रो. ब्रज किशोर स्वाईए राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो.राधावल्लभ त्रिपाठीए पूना विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका प्रो. निर्मला कुलकर्णी सम्मिलित हुए।
 भारतीय चित्रकला पर कार्यशाला 28 मार्च से
- विद्वानों ने कार्यशाला में स्थापित किया कि भारतीय शोध परंपरा काफी प्राचीन है एवं इसे स्थापित करने के लिए सांची विवि को पहल करना चाहिए। कार्यशाला में ग्रंथ संपादन एवं पांडुलिपि शास्त्र को स्वतंत्र विज्ञान के रुप में स्थापित करने के भी सुझाव प्राप्त हुए। सांची विश्वविद्यालय का प्रयास है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जो भी लिखित साहित्य, मानवीय ज्ञान के अभाव में अब तक लिपिबद्ध नहीं किया जा सका है, उसे लिपिबद्ध कर विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इस तरह से सांची विश्वविद्यालय के प्रयासों से ज्ञान का एक नया श्रोत मानवता के सामने आ सकेगा। विश्वविद्यालय द्वारा 28 मार्च से 3 अप्रैल तक भारतीय चित्रकला पर कार्यशाला रूपायन का आयोजन कर रहा है जिसमें भारतीय समाज के विभिन्न आध्यात्मिक पहलुओं का चित्रों के माध्यम से प्रस्तुतिकरण होगा। कार्यशाला में समाज में आ रही नैतिक गिरावट को दर्शन और चित्रों के समन्वय से अभिव्यक्त करने का प्रयास होगा।

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