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संपादकीय

चौकस हैं हमारी सभी एजेंसियां

By Raj Express | Publish Date: 2/27/2017 1:00:56 PM
चौकस हैं हमारी सभी एजेंसियां

 इस्लामिक स्टेट के दो संदिग्ध फिर पकड़े गए हैं। वैसे तो इस आतंकी संगठन से जुड़े लोगों की अपने देश में पिछले दो-ढाई वर्षो में दो दर्जन से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं,लेकिन ताजा धरपकड़ एक लंबे अंतराल के बाद हुई है। इसके तीन संदिग्ध गुर्गे अक्टूबर-2016में पश्चिम बंगाल के मालदा में पकड़े गए थे और उसके बाद यह दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है। गुजरात पुलिस के आतंक निरोधी दस्ते(एटीएस)ने एक संदिग्ध की गिरफ्तारी तो राजकोट से की है,जबकि दूसरा भावनगर से पकड़ा गया है। ये दोनों सगे भाई हैं और आरोप है कि ये हमला करने की फिराक में थे। उनके पास विस्फोटक भी मिला है। बहरहाल,अभी नहीं कहा जा सकता कि गुजरात एटीएस के राडार पर ये लोग आए कैसे?क्या इनके बारे में उसे कोई जानकारी लीबिया में इस्लामिक स्टेट के चंगुल से मुक्त कराए गए डॉ.राममूर्ति ने दी है या उस संदिग्ध ने जो14फरवरी को अबु धाबी से लौटने के बाद दिल्ली में पकड़ा गया था?यह संदिग्ध केरल का है,जो अबु धाबी में रहकर इस्लामिक स्टेट के लिए काम कर रहा था एवं14फरवरी को वह लौटा,तो उसे दिल्ली में हवाई अड्डे पर ही एनआईए ने पकड़ लिया था।

खैर,हुआ जो भी हो,मगर हमारे मतलब की बात केवल यह है कि हमारी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं। वैसे भी जब दुनिया की ज्यादातर एजेंसियां मानकर चल रही हैं कि इस्लामिक स्टेट इराक व सीरिया में अब कमजोर होने लगा है,इसलिए उसके आतंकवादी पाकिस्तान व बांग्लादेश में अपना नया ठिकाना बना सकते हैं,तो चौकसी जरूरी भी है। बताने की जरूरत नहीं कि अब पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों की तो जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट लेने लगा है। जैसे-हाल ही में सूफी संत लाल शहबाज कलंदर की दरगाह पर हुए भीषण आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ही ली थी। बांग्लादेश की कहानी भी इससे अलग नहीं है।  जुलाई-2016में जब ढाका में एक कैफे पर हमला हुआ था, तब बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि हमले को स्थानीय चरमपंथी गुट ने अंजाम दिया है,न कि किसी विदेशी संगठन ने, मगर उसके बाद से वहां आईएस के संदिग्धों की गिरफ्तारियां प्राय:होती हैं।
इसका मतलब यह है कि विदेशी खुफिया एजेंसियों की यह आशंका सही है कि इस्लामिक स्टेट की गतिविधियां हमारे पड़ौस में बढ़ती चली जा रही हैं। बेशक,हमारे सामने उतना बड़ा संकट तो नहीं है,जितना कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के सामने हैं। इन दोनों देशों में कई कट्टरपंथी समूह सक्रिय हैं,जबकि भारत में ऐसा संभव ही नहीं है। ऐसे संगठनों का फन हम शुरुआत में ही कुचल देते हैं, जबकि मुस्लिम धर्मगुरु भी युवाओं को इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से दूर रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि हम निश्चिंत रहें। सावधानी इसलिए जरूरी है कि दो-चार ही सही,पर पढ़े-लिखे युवा इस्लामिक स्टेट की तरफ आकर्षित होते देखे गए हैं और इसलिए भी कि यह संगठन बहुत खतरनाक है। यह अच्छी बात है कि हमारी एजेंसियां सतर्क हैं भी।
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