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संपादकीय

आईएस के निशाने पर है भारत

By Raj Express | Publish Date: 2/28/2017 11:36:34 AM
आईएस के निशाने पर है भारत
खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस के द्वारा खतरनाक हमलों से भारत को दहलाने की कोशिश को हमारी मुस्तैद सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर देश को एक बड़े संकट से बचा तो लिया है,लेकिन यह साफ हो गया है कि इस्लामिक स्टेट भारत में भी फ्रांस जैसा कहर बरपाने पर आमादा है। अभी रविवार को ही गुजरात एटीएस की गिरफ्त में आए दोनों भाई वसीम और नईम इस्लामिक स्टेट के आतंकी बनकर फ्रांस के नीस की तर्ज पर ही भारत में भी किसी खौफनाक कार्रवाई को अंजाम देने का इरादा किए हुए थे। इसके पहले आईएस के मुखपत्र‘दबिक’में भी भारत पर हमला करने की बात कही गई थी। इससे पता चलता है कि इस्लामिक स्टेट भारत के प्रति कितने खतरनाक इरादे पाले हुए बैठा है। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट की एक और पत्रिका ‘इंस्पायर’ने भी दुनिया भर के जेहादियों को यह संदेश दिया है कि वे कथित इस्लामिक हितों की रक्षा के लिए अकेले और कम खर्च पर ऐसे आतंकी हमलों को अंजाम दें,जिनमें दहशत और नुकसान की ज्यादा गुंजाइश हो। यह तो हमें पता ही है कि पिछले दिनों यूरोपीय देशों में भी ट्रक या कार को माध्यम बनाकर उन्हें बाजार में लोगों की भीड़ में घुसाकर मारने के दुस्साहसिक आतंकी प्रयास किए गए हैं। मजहब के नाम पर अपनी आतंकवादी हसरतों को पूरा करने पर आमादा इस्लामिक स्टेट ने जेहाद को ही अपना प्रमुख हथियार बनाया हुआ है व इसी के सहारे उसने अनेक राष्ट्रों के मुस्लिम युवाओं को गुमराह करने में जबर्दस्त सफलता पाई है।
यहां विचारणीय यह है कि भारत जैसे मध्यमार्गीय और धर्मनिरपेक्ष चरित्र वाले देश में रहने वाले वसीम और नईम जैसे पढ़े-लिखे नौजवानों को भी इस्लामिक स्टेट द्वारा कथित रूप से काफिरों से बदला लेने के लिए तैयार कर लेना,भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र,देश की एकता, अखंडता और हमारी सुरक्षा के लिए गहरे खतरे के संकेत हैं। हमें यह भी पता होना चाहिए कि भारत में आईएस ने भर्ती के लिए बाकायदा हिंदी,तमिल और उर्दू में जेहादी साहित्य को सोशल मीडिया के द्वारा प्रसारित किया है। वसीम और नईम की गिरफ्तारी से एकदम साफ है कि इस कुख्यात आतंकवादी संगठन की नजर भारत के उन पढ़े-लिखे मुस्लिम युवाओं पर ही है, जो तकनीकी रूप से पूर्णत:दक्ष हैं। इन पढ़े-लिखे मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक कट्टरता का पाठ पढ़ा कर उनका उपयोग विध्वंसक कामों में किया जा सके,यही आईएस का मुख्य मकसद है। हमारे सामने एक बड़ी समस्या यह भी आ रही है कि भारत से काफी संख्या में युवा रोजगार पाने के लिए अरब देशों में जाते हैं। ज्यादातर अरब देशों में धार्मिक कट्टरता का निर्बाध प्रवाह है और इसी की गिरफ्त में भारतीय युवा भी आ रहे हैं। कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने मोईनुद्दीन पराकाडथ नाम के एक शख्स को पकड़ा था। वह केरल का रहने वाला था और अबू धाबी में रहकर केरल में इस्लामिक स्टेट को स्थापित करने और वहां के युवाओं को  उससे जोड़ने के लिए प्रयत्नशील था। इसके अलावा अफगानिस्तान में ड्रोन हमले में मारा गया हफीजुद्दीन भी केरल का ही रहने वाला था। बताया जाता है कि वह भी खाड़ी देशों से ही कट्टरता का पाठ सीखकर आया था। उल्लेखनीय है कि इस्लामिक स्टेट के उभार के दौर में अमेरिका में आतंकवाद पर छपी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि भारत में मुस्लिमों की आबादी इतनी ज्यादा है कि यदि इस्लामिक स्टेट को कुछ फीसदी भी समर्थन मिला तो उसे वहां भारी संख्या में अनुयायी मिल जाएंगे। ज्ञात हो कि पिछले कुछ महीनों में देश के कई राज्यों से आईएस के कथित संदिग्धों की धर-पकड़ हुई है। देखने में आया है कि भारत में आईएस का प्रभाव बड़े शहरों में ही नहीं,बल्कि छोटे शहरों में भी बढ़ रहा है,जिसे कट्टरपंथी ताकतें बढ़ावा दे रही हैं। जाहिर है,आईएस जैसे जेहादी संगठन को भर्ती के लिए भारत एक मुफीद स्थान प्रतीत हो रहा है,जबकि ऐसा है नहीं। अभी हाल ही में इस्लामिक स्टेट की गिरफ्त से आजाद हुए भारतीय डॉ. के. राममूर्ति ने अपने अठारह महीने के खौफनाक अनुभवों को साझा करते हुए यह साफ किया कि आईएस के लड़ाके भारत को लेकर संजीदा हैं और यहां पर प्रभाव जमने का उन्हें भरोसा भी है। दुनियाभर में बदनाम बहावियों के आतंक की मानसिकता वाले मदरसे भारत में भी होने की बात सामने आई है,जिनसे निकल कर युवा दुनियाभर में आईएस की डरावनी और आक्रामक विचारधारा को फैलाते मिलते हैं। भारत के उत्तरप्रदेश और बिहार से निकलने वाले मौलवी और उलेमा पूरी दुनिया में धार्मिक प्रचार के लिए इस्लामिक दुनिया की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। ये लोग प्रचार-प्रसार के माध्यम से मुस्लिम युवाओं को धार्मिक कट्टरता के लिए उकसाते हैं।
बेशक,सिमी और आईएम माड्यूलों से लगभग दो दशक से जूझ रहीं और अब उसे काफी हद तक अप्रभावित कर चुकीं हमारी सुरक्षा एजेंसियां इस्लामिक स्टेट को भारत में प्रभाव नहीं जमाने देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन कश्मीर के आतंक से अभिशप्त इस देश में इस्लामिक स्टेट कश्मीर के रास्ते ही दस्तक दे सकता है। पिछले करीब एक साल से कश्मीर में विरोध का जो अलगाववादी खेल चल रहा है,उसमें आईएस के काले झंडे लहराने की दर्जनों घटनाएं हुई हैं और देश के भिन्न-भिन्न इलाकों में भी इसी तरह की घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं।
हम सभी यह भलीभांति जानते ही हैं कि कश्मीर में मुसलमानों पर कथित अत्याचार के दुष्प्रचार के नाम पर पड़ौसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भी भारत में आतंकवाद की मजबूत जमीन तैयार करने में सफलता पाई है। आपको बता दें कि इस्लामिक स्टेट जैसी मजहबी मानसिकता को पसंद करने वाले कुख्यात आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भी भारत में कई महत्वपूर्ण स्थानों को अपना निशाना बनाया है। इसके संपर्क में सिमी और इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी रहे हैं। इनमें से अधिकांश लोग जेल में हैं व उनकी स्लीपर सेल अनुकूल समय के इंतजार में है।
ये ऐसी मानसिकता वाले लोग हैं,जिनका मानना है कि आतंकवादियों को किसी भी देश,मुस्लिम अथवा गैर-मुस्लिम और किसी भी प्रकार की सरकार के खिलाफ जेहाद छेड़ने का अधिकार है। वे धार्मिक उन्माद के लिए किसी भी राष्ट्र की सीमाओं को मान्यता नहीं देते हैं। बहरहाल,हमारी खुफिया एजेंसियां एनआईए,रॉ,आईबी और एसटीएफ में बेहतरीन समन्वय देखने में आ रहा है और इनकी सजगता के कारण ही देश में आतंकवादी हमलों में कमी आई है। लेकिन दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के वीभत्स इरादों की भारत में दस्तक से आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां अब पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ती लग रही हैं।
 ब्रह्मदीप अलूने (स्वतंत्र टिप्पणीकार)
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