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संपादकीय

देश के गद्दारों को कठोर दंड

By Raj Express | Publish Date: 2/28/2017 11:38:47 AM
देश के गद्दारों को कठोर दंड

 इंदौर की जिला अदालत ने प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन सिमी(इस्लामिक स्टूडेंट मूवमेंट ऑफ इंडिया)के सरगना सफदर नागौरी समेत11देशद्रोहियों को उम्रकैद की सजा सुनाकर उनको उनके गुनाह का ही दंड दिया है। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की खासतौर पर तारीफ होनी चाहिए,जिसने इन सभी देशद्रोहियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। वरना तो हमारे देश में आतंकियों को सजा मिलने का रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है। पिछले वर्ष आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि वैसे तो सभी अपराधों में सजा मिलने की दर हमारे देश में बहुत कम यानी30फीसदी के आसपास है,लेकिन आतंकवाद से जुड़े मामलों में यह दर और भी कम(करीब 27फीसदी)है। जाहिर है कि बहुत से आरोपी इसलिए बरी हो जाते हैं,क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा पाता। लेकिन मध्यप्रदेश पुलिस साक्ष्य जुटाने की कसौटी पर खरी उतरी। वही थी,इस मामले में अभियोजन पक्ष,जिसने इन सभी को न केवल भारतीय दंड विधान की धारा-124(राजद्रोह)के तहत गिरफ्तार किया,बल्कि कोर्ट में भी आरोपियों को दोषी सिद्ध करने का काम कर दिखाया। तारीफ इंदौर की जिला अदालत और उसके विशेष जज बीके पलौदा की भी होनी चाहिए, जिन्होंने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। वैसे भी भारतीय न्यायपालिका की पहचान ही यह है कि उसके द्वारा सभी मामलों में दूध का दूध और पानी का पानी ही किया जाता है। बशर्ते,अभियोजन पक्ष ठोस सबूत उसके सामने रख पाया हो। तारीफ तो प्रॉसिक्यूटर (अभियोजन पक्ष के वकील)विमल मिश्रा की भी होनी चाहिए,जिनकी दलीलों ने बचाव पक्ष को कोई मौका ही नहीं दिया। इसका नतीजा हमारे सामने है। सभी देशद्रोही अब अपने किए की सजा भुगतेंगे। हालांकि, मुकदमा ऊंची अदालतों में जा सकता है। लेकिन इंदौर की अदालत ने अपना काम कर दिया है। थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो इन सभी को27मार्च-2008को इंदौर के श्याम नगर से गिरफ्तार किया गया था। तब इनके पास से भारी मात्र में खतरनाक हथियार,जहरीला साहित्य और देश के विभिन्न संवेदनशील स्थानों के नक्शे बरामद किए गए थे।

जब पुलिस ने इस प्रश्न का जवाब खोजना शुरू किया कि इनके पास से नक्शे क्यों बरामद हुए,तो सामने आया कि सफदर नागौरी ओसामा बिन लादेन के आतंकी संगठन अलकायदा के अलावा पाकिस्तान के भी कई आतंकी संगठनों के संपर्क में था। इनके निशाने पर न केवल कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के परमाणु ठिकाने थे,बल्कि देश के कुछ अन्य सुरक्षित क्षेत्र भी,जहां ये हमला करना चाहते थे। ऐसा कोई कारण नहीं था कि पुलिस की इस कहानी पर संदेह होता। सिमी का गठन अप्रैल-1977में उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था और चूंकि यह कट्टरता का समर्थक था,इसलिए उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। जो कट्टर होता है, वह कुछ भी कर सकता है। लेकिन इस संगठन के आतंकवादियों ने जो किया,अब उसकी उन्हें सजा भी मिल गई है। यह इंसानियत की जीत है।
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