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संपादकीय

प्रदेश के विकास को मिलेगी गति

By Raj Express | Publish Date: 3/2/2017 11:21:55 AM
प्रदेश के विकास को मिलेगी गति
खेल, राजनीति व सत्ता में अनुभव सदा लाभकारी होता है और इसकी पुष्टि कर दी है, प्रदेश की 13 साल की अनुभवी सरकार और उसके वित्तमंत्री जयंत मलैया ने जनहितैषी बजट प्रस्तुत करके। वित्तमंत्री ने अपने भाषण में एक शेर पढ़ा-‘जब हौसला बढ़ा लिया ऊंची उड़ान का, तब देखना बेकार है कद आसमान का।’ बजट भी इसी के अनुरूप है। उसमें सभी वर्गो का ध्यान रखने की कोशिश की गई है। उसमें सबका साथ, सबका विकास का भाव भी नजर आता है। मध्यप्रदेश सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के विकास की अवधारणा के अनुरूप बजट पेश किया, जिसमें गांव, गरीब, मजदूर, किसान, व्यापारी, कर्मचारी सभी का ध्यान रखा गया है। प्रदेश के उद्योगों, कृषि, स्कूल शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार, नदी संरक्षण आदि के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं। बजट संतुलित है। यह प्रदेश को विकास की राह पर ले जाने वाला बजट है। पूरे बजट का अवलोकन करने पर ऐसा लगता है, जैसे सरकार ने कबीरदास जी के दोहे-‘कबिरा खड़ा बाजार में, मांगै सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ को दृष्टिगत करके तैयार किया है उसे। यानी, सरकार ने बजट में बस यही चाहा है कि सबका भला हो। जैसा कि होता ही है, विपक्ष इस बजट को भाजपा सरकार के मिशन 2018 की तैयारी कह सकता है। अगले साल शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सत्ता संभालने के लिए मैदान में उतरेंगे। ऐसे में उन्हें अपनी चुनौतियां मालूम हैं, तभी तो उनका रुख गांव की ओर रहता है। आखिर, वे गांव एवं गरीब के नेता बनकर ही तो तीन बार से सत्ता में हैं। उन्होंने बजट का फायदा भी आम जनता को दिया है। मुख्यमंत्री ने पिछले एक वर्ष में जनता के बीच जितनी भी घोषणाएं की हैं, उनमें से अधिकांश की प्रतिपूर्ति इस बजट में करने की कोशिश की गई है। साथ ही इसमें केंद्र सरकार की इच्छाओं को भी ध्यान में रखा गया है। बजट में इस बार स्वच्छ भारत मिशन और गांवों की तरक्की के द्वार खोले गए हैं। निर्मल भारत मिशन के तहत प्रदेश में 23 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य है। अमृत योजना के लिए सात सौ करोड़ रुपए दिए जाएंगे। सरकार का यह सराहनीय प्रयास है कि जनता को महंगी जांच सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में ही दी जाएंगी। इसी तरह पिछड़े क्षेत्रों में छात्रवास खोलने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 36 हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इससे निश्चित रूप से प्रदेश के गांव, गरीब और मजदूर का विकास होगा। गांवों में स्वच्छ भारत मिशन को सार्थक करने की दिशा में प्रदेश सरकार जो काम कर रही है, वह भी सराहनीय है। बजट में भी उसने गांवों व ग्रामीणों की तरक्की का खास ध्यान रखा।सिंचाई सुविधाओं के विकास पर नौ हजार 850 करोड़ खर्च होंगे। इससे निश्चित ही गांवों में खुशहाली आएगी। सातवें वेतनमान का इंतजार कर रहे मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी खुशखबरी दे दी है। जनवरी-2017 से कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का नगद भुगतान किया जाएगा। यह वेतनमान लागू करने से उस पर करीब चार हजार करोड़ रुपए का बोझ जरूर बढ़ जाएगा। पर प्रदेश के करीब नौ लाख कर्मचारियों को इसका लाख मिलेगा। इनमें से नियमित कर्मचारी चार लाख हैं। प्रदेश सरकार का सबसे सराहनीय कदम है, गरीबों को पांच रुपए में भरपेट भोजन। शिवराज सिंह चौहान ने गरीबों को भरपेट भोजन कराने के लिए दीनदयाल कैंटीन शुरू करने की घोषणा की थी। यह घोषणा वर्ष-2016 में की गई थी। इसके मुताबिक अब प्रदेश में जल्दी दीनदयाल कैंटीनें शुरू हो जाएंगी। इन कैंटीनों में सुबह के नाश्ते के साथ ही गरीबों को दोपहर का भोजन भी कम से कम दामों में उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि पहले इसकी राशि 10 रुपए तय की गई थी। मगर अब केवल पांच रुपए में खाना दिया जाएगा। इसका लाभ शहर के ऐसे लोगों को दिया जाएगा, जो श्रमिक वर्ग में आते हैं।शिक्षा के लिए भी बजट में बहुत कुछ है। प्रदेश में पहली से 11वीं तक की कक्षा में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई जाएगी। बजट में मेधावी छात्र योजना हेतु सरकार ने एक हजार करोड़ का अनुदान दिया है। इसके तहत 12वीं में 85 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने पर ट्यूशन फीस में ऋण मुक्ति रहेगी। बजट की खास बात यह रही कि सरकार का चिकित्सा क्षेत्र की ओर विशेष ध्यान रहा। प्रदेश की मेडिकल व्यवस्था को एक गंभीर सर्जरी की जरूरत थी, जिसकी कोशिश सरकार ने की है। चिकित्सा शिक्षा के लिए सात हजार 472 करोड़ का प्रावधान किया गया है। एक समस्या हमेशा रहती है कि किस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों तक मेडिकल व्यवस्था को पहुंचाया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बजट में उन डॉक्टरों को विशेष भत्ता देने का प्रावधान किया गया है, जो इन क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। प्रदेश में सात नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 590 करोड़ रुपए का बजट है। सरकार ने अपनी उस घोषणा को भी दोबारा इस बजट में सुनाया है, जो वह पिछले बजट में कर चुकी थी कि हर जिला अस्पताल में कीमोथैरेपी और डायलिसिस की सुविधा होगी। हालांकि, इस बार उसने कहा है कि यह सुविधा सभी जगह पर शुरू हो गई है। लेकिन सरकार ने हर वर्ग को कुछ न कुछ देने के प्रयास में बहुत बड़े वर्ग यानी कारोबारी जगत को खाली हाथ ही छोड़ दिया है। उसे इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है। उसे जिस तरह की रियायतों की उम्मीद थी, सरकार ने वैसा कुछ भी नहीं किया है। हालांकि, प्रदेश में नए उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके लिए प्रदेश में नौ नए इंडस्ट्रियल एरिया बनाने हेतु 161 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। स्मार्ट सिटी के पहले फेज के लिए सात सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, आईटी पार्क बनाने के लिए 58 करोड़ के बजट को मंजूरी मिली है। महिलाओं, युवा, स्टार्टअप जैसी योजनाओं के लिए सरकार के खजाने से कुछ खास नहीं निकल पाया। हां, नर्मदा यात्र के लिए उसने दिल खोलकर पैसा देने की कोशिश की है। 15 सौ करोड़ रुपए नर्मदा किनारे पेड़ लगाने के लिए दिए गए हैं। सरकार ने नर्मदा किनारे की शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला किया है। वित्तमंत्री ने नर्मदा किनारे बनी कुल 66 शराब की दुकानों को एक अप्रैल-2017 से पहले बंद करने का ऐलान किया है। बजट में एक हजार से अधिक आबादी वाली बस्तियों को नल-जल योजना से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत ऐसी बस्तियों तक साफ पानी नल के जरिए पहुंचाया जाएगा। कुल मिलाकर सरकार ने इस बार बजट में प्रदेश की साढ़े सात करोड़ आबादी का ख्याल रखने की कोशिश की है। यदि संक्षेप में कहा जाए तो शिवराज सरकार का बजट प्रदेश के विकास को गति देने वाला है।
विनोद कुमार उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार)
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