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संपादकीय

ट्रंप का संबोधन आशाजनक नहीं

By Raj Express | Publish Date: 3/2/2017 11:25:11 AM
ट्रंप का संबोधन आशाजनक नहीं
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बहुप्रतीक्षित भाषण हो गया। यह उनका पहला भाषण था, इसलिए दो कारणों से दुनिया का ध्यान उसकी तरफ खासतौर पर था। एक-संसार जानना चाहता था कि इस भाषण में ट्रंप संयमित रहते हैं या नहीं या फिर वे वैसा ही बोलते हैं, जैसा अपने चुनावी अभियान से लेकर अब तक बोलते रहे हैं। दो-अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह भी जानना चाहता था कि कांग्रेस के सदस्यों का उनके प्रति कैसा व्यवहार रहता है? यह सवाल तब और रोमांचक हो उठा था, जब यह खबर चल पड़ी थी कि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी जल्दी ही सीनेट (अमेरिकी कांग्रेस के उच्च सदन) में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है। बहरहाल, अब इन दोनों सवालों का जवाब मिल चुका है। कांग्रेस ने ट्रंप के प्रति बहुत ही शानदार व्यवहार किया। उनके भाषण को ध्यान से सुना गया और ऐसे भी कई मौके आए, जब अमेरिकी सांसदों ने अपने राष्ट्रपति के भाषण के बीच खड़े होकर तालियां बजाईं। यह अनुमान तो ट्रंप को भी नहीं रहा होगा कि उनकी संसद के पक्ष और विपक्ष उन्हें इस तरह सम्मान देंगे कि उन्हें अपना भाषण बार-बार रोकना पड़ेगा।
इसके बाद कायदे से उन्हें अपने तेवर थोड़े नरम करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। डोनाल्ड ट्रंप के भाषण में वही सब था, जो दुनिया उनके मुंह से लगातार सुनती रही है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी नीतियों की निंदा वे पहले भी करते रहे हैं और कांग्रेस में भी की। अप्रवासियों के प्रति वे अब भी पहले की तरह ही सख्त दिखे। उन्होंने कहा कि दुनिया के जिन लोगों को अमेरिका में आने का सम्मान मिला है, उन्हें यहां के मूल्यों का सम्मान करना होगा। नेता आतंकवाद को धर्म से जोड़ने से बचते हैं, केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के ज्यादातर देशों के नेता। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवाद को इस्लामिक आतंकवाद कहा। यह बात उनके पूरे भाषण में तीन बार आई। उन्होंने यह भी कहा कि इस आतंकवाद को वे उखाड़कर फेंक देंगे। राष्ट्रपति ने अपनी कांग्रेस को बताया कि उन्होंने इस्लामिक स्टेट को खत्म करने का तगड़ा प्लान जल्दी ही बनाने के निर्देश अमेरिकी रक्षा मंत्रलय को दे दिए हैं। अर्थव्यवस्था, मैक्सिको-अमेरिका विवाद, सात मुस्लिम देशों के नागरिकों पर पाबंदी, अमेरिका-इस्रायल संबंध जैसे सभी विषयों पर डोनाल्ड ट्रंप के विचारों में रत्तीभर भी परिवर्तन नहीं दिखा। हां, उनके भाषण में रूस और चीन का जिक्र नहीं था। ट्रंप जानते ही हैं कि विपक्षी डेमोकेट्रिक पार्टी जहां रूस से संबंध सुधारने की विरोधी है, तो वह यह भी चाहती है कि अमेरिका एवं चीन के रिश्ते तनावपूर्ण नहीं होने चाहिए। इसीलिए विपक्ष को साधने के लिए उन्होंने अपने भाषण में इन दोनों देशों का जिक्र तक नहीं किया। अलबत्ता, उन्होंने कनसास में मारे गए भारतीय इंजीनियर के परिवार के प्रति संवेदना जताई, जो हमारे लिए राहत की बात है, लेकिन एच-1 बी वीजा पर ट्रंप अपने रुख पर कायम हैं, जो ठीक नहीं है। अत: संक्षेप में कहें तो उनके भाषण में दुनिया के लिए आशाजनक कुछ भी नहीं था। 
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