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संपादकीय

देर से ही सही पर दुरुस्त आया पाकिस्तान

By Raj Express | Publish Date: 2/21/2017 2:06:41 PM
देर से ही सही पर दुरुस्त आया पाकिस्तान

 दुनियाभर में धार्मिक कट्टरपंथी देश माना जाने वाला पाकिस्तान अब हिंदुओं के लिए बदल रहा है। यह वही देश है,जहां पर मुसलमानों का एक फिरका दूसरे फिरके को बर्दाश्त नहीं कर पाता,मकबूल कव्वाल को सरेआम गोलियों से भून दिया जाता है, मस्जिदों और मजारों को तबाह किया जाता है, नमाजियों और जायरीनों का बेरहमी से कत्ल किया जाता है। उसी देश की हुकूमत पिछले कुछ समय से हिंदुओं के साथ नरम रुख अख्तियार किए हुए है। उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने हेतु वह कई कदम उठा रही है। फिलहाल,हिंदू विवाह अधिनियम विधेयक-2017को सीनेट की मंजूरी मिल गई है। नेशनल असेंबली इसे15सितंबर-2015को ही मंजूरी दे चुकी थी। यह विधेयक पाक के पंजाब,बलूचिस्तान एवं खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा। सिंध प्रांत पहले ही अपना हिंदू विवाह कानून बना चुका है। अब पाक की हिंदू महिलाओं को उनके विवाह का प्रमाण-पत्र मिल सकेगा। विवाह के15 दिनों के भीतर इसका पंजीकरण कराना होगा। इस से पहले वे अपने विवाह को पंजीकृत नहीं करा सकती थीं। इस विधेयक में प्रावधान है कि विवाह के वक्त लड़का और लड़की,दोनों की उम्र18साल से अधिक होनी चाहिए। महिला को अपने पति की मौत के छह माह बाद दूसरा विवाह करने का अधिकार होगा। पहली पत्नी के रहते कोई हिंदू दूसरा विवाह नहीं कर पाएगा। यदि किसी ने ऐसा किया तो उसे छह माह की कैद की सजा होगी व पांच हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान भी है। इस कानून में महिलाओं व बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का भी इंतजाम किया गया है। पति-पत्नी अगर एक साल से अलग रह रहे हैं और तलाक लेना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर पाएंगे। हिंदू विवाह अधिनियम का एक बड़ा फायदा यह होगा कि इससे हिंदू महिलाओं के जबरन धर्मातरण कराने पर रोक लग सकेगी। हिंदुओं का आरोप है कि विवाह पंजीकरण न होने की वजह से उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। नाबालिग हिंदू लड़कियों का अपहरण करके उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है व जबर्दस्ती उनका विवाह कराया जाता है। विधवा हिंदू महिलाओं की हालत भी अच्छी नहीं है। उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। अब उनके पास विवाह का सबूत भी होगा और उन्हें तलाक लेने, जबरन विवाह तथा18वर्ष से पहले विवाह करने जैसे दबाव के खिलाफ शिकायत करने का हक मिल जाएगा। पहले उन्हें इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। अपने विवाह को साबित करने के लिए उनके पास कोई दस्तावेज नहीं होता था। आजादी के सात दशक बाद भी हिंदू पुनर्विवाह, संतान को गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे कानूनी अधिकारों से वंचित थे। लेकिन अब नए कानून से उन्हें अपना पहचान-पत्र बनवाने में आसानी होगी। उन्हें बैंक में खाता खोलने,वीजा के लिए आवेदन करने,राष्ट्रीय पहचान पत्र मिलने,सरकारी सुविधाएं लेने और अपनी जायदाद में हिस्सेदारी जैसे अनेक फायदे मिलने लगेंगे। गौरतलब है कि पाकिस्तानी सरकार हिंदुओं की समस्याओं के समाधान को खास तवज्जो दे रही है। कानून मंत्री जाहिद हमीद ने जब विधेयक को सीनेट में पेश किया,तो किसी ने इसका विरोध नहीं किया। सभी सियासी दलों के सांसदों ने हमदर्दी जताते हुए सर्वसम्मति से इसे पास होने दिया। बीते माह प्रसिद्ध कटास राज मंदिर परिसर में नवाज शरीफ ने कहा था-‘मैं सिर्फ मुसलमानों का ही नहीं,अल्पसंख्यकों का भी प्रधानमंत्री हूं। बहुत ही जल्द पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के दोस्त के तौर पर देखा जाएगा।’सालभर पहले इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय के लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खास जगह मुहैया कराई गई,ताकि वे अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट बना सकें। बता दें कि हिंदू अब तक बौद्धों के श्मशान घाट का ही इस्तेमाल किया करते थे।

साल-1998की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान में95 फीसदी आबादी मुसलमानों की है,वहीं गैर-मुस्लिम महज पांच फीसदी ही हैं,जिनमें हिंदू,सिख,ईसाई,बौद्ध,पारसी,जैन आदि शामिल हैं। अकेले हिंदुओं की ही बात करें,तो इनकी आबादी दो फीसदी है।1998की जनगणना के मुताबिक पाक में करीब25लाख हिंदू थे। वहां सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक सिंध प्रांत में रहते हैं। पहले सिंध के हिंदू विवाह को मान्यता देने के लिए स्थानीय पंचायत, पाकिस्तान हिंदू काउंसिल व स्थानीय यूनियन काउंसिल की शरण लेते थे। स्थानीय पंचायत व पाकिस्तान हिंदू काउंसिल में शादी का पंजीयन कराना आसान था, जबकि यूनियन काउंसिल में अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उल्लेखनीय है कि पाक के सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (एनएडीआरए)को हिंदू विवाह को पंजीकृत करने का आदेश दिया था। इसके बाद2014के आखिरी में एनएडीआरए ने अल्पसंख्यकों के विवाह का पंजीकरण शुरू किया था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कानून को बनाना एक बात है और उसे लागू करना दूसरी बात। बहरहाल,इस नए कानून से पाकिस्तान के हिंदुओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद तो अब बढ़ी है।
फिरदौस खान (स्वतंत्र टिप्पणीकार)
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