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संपादकीय

पाकिस्तान की सेहत पर नहीं पड़ेगा फर्क

By Raj Express | Publish Date: 3/8/2017 11:21:21 AM
पाकिस्तान की सेहत पर नहीं पड़ेगा फर्क

भारत यात्रा पर आए पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) महमूद अली दुर्रानी ने कहा है कि 26 नवंबर-2008 को मुंबई में जो भीषण आतंकवादी हमले हुए थे, उनकी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। वैसे, उनकी समझ में जब आ गया कि वे अपने बयान के कारण उलझ सकते हैं, तो उन्होंने पाकिस्तान की सरकार, फौज और आईएसआई को पाक-साफ भी बता दिया, यह कहकर कि हमलों में इन सबका हाथ तो खैर नहीं था और जो किया, वह आतंकवादी संगठनों ने किया था। दरअसल, उन्हें लौटकर अपने देश भी जाना है और उन्हें अनुमान होगा ही कि जब वे इस्लामाबाद पहुंचेंगे, तो उनके साथ क्या होगा, लेकिन उनकी जुबां पर जो आ गया, सच वही है। हां, उन्होंने जो कहा है, वह पहली बार नहीं कहा है। अमेरिका में आतंकवाद पर हुई एक सेमिनार में भी उन्होंने जून-2010 में मुंबई हमलों पर न केवल गहरा दुख जताया था, बल्कि यह भी कहा था कि इस कांड की पूरी साजिश पाकिस्तान में की गई है। हमले के फौरन बाद भी उन्होंने वही सब कहा ही था, जो वे अब कह रहे हैं। इसकी वजह से ही उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद से हटा दिया गया था। फिर, वे अकेले नहीं हैं, जो उन हमलों में पाक का हाथ स्वीकार करते हैं। पाकिस्तान में इस तरह के कई सज्जन लोग हैं, तो मान लेते हैं कि उनके देश में भारत के विरुद्ध साजिश होती है। बात यदि मुंबई हमलों की ही करें तो आईएसआई के भूतपूर्व प्रमुख एवं पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने अपनी किताब ‘इंडिया वर्सेज पाकिस्तान’ में भी माना था कि मुंबई कांड की साजिश पाकिस्तान में की गई थी। हालांकि, किताब में उन्होंने यह भी लिखा है कि हमले में आईएसआई का कोई हाथ नहीं था। यह कारस्तानी आतंकवादियों की थी। इस किताब में हमारे देश की तथाकथित अपरिपक्वता और पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीतियों पर भी दुख जताया गया है, पर उसमें यह माना गया है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों ने भारत के खिलाफ साजिश की और पाक सरकार उन्हें दंडित नहीं कर पाई। पाकिस्तान के पूर्व मंत्री और मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी भी मानते रहे हैं कि मुंबई हमलों में पाकिस्तान का हाथ था। इस तरह दुर्रानी ने जो भी कहा है, उसमें नया कुछ भी नहीं। हमारे देश के वे लोग बहुत भोले हैं, जो मानते हैं कि दुर्रानी के खुलासों के बाद पाकिस्तान हाफिज सईद जैसे हमारे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए न केवल मजबूर हो जाएगा, बल्कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी भी उस पर दबाव बनाएगी। यह सही है कि इस वक्त हाफिज सईद नजरबंद है, लेकिन वह इसका इकलौता गुनहगार नहीं है। मुंबई हमलों की साजिश में कम से कम दो दर्जन आतंकवादी शामिल थे। जकीउर्रहमान लखवी जैसे आतंकी कुछ दिनों तक तो जेल में रहे, पर वे फिलहाल बाहर हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने इस पर कुछ नहीं किया, तो दुर्रानी के खुलासों के बाद वह करेगी भी क्या? दुनिया पाकिस्तान को कार्रवाई करने के लिए इसके बाद भी बाध्य नहीं कर पाई कि हमने मुंबई हमलों में उसकी लिप्तता के प्रमाण पाक को ही नहीं, अमेरिका, सऊदी अरब, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे बहुत से देशों को भी दिए थे। मगर एक भी देश ने उस पर दबाव नहीं बनाया। अमेरिका ने भी ठोस कुछ नहीं किया, केवल समय-समय पर पाकिस्तान के खिलाफ भाषण दिए हैं, जबकि इस्रायल और अमेरिका की जांच एजेंसियों के सहयोग की वजह से मुंबई हमलों में पाकिस्तान की संलिप्तता के जितने प्रमाण अमेरिका के पास थे, उतने शायद हमारे पास भी नहीं थे। इन हमलों में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड कोल मैन हेडली की संलिप्तता का पता अमेरिका ने लगाया था, भारतीय जांच या खुफिया एजेंसियों ने नहीं। इसके बावजूद पाकिस्तान ने हमेशा यही कहा है कि मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता के भारत पुख्ता प्रमाण नहीं देता है, फिर भी दुनिया तमाशा ही देखती रही है। अत: अब वह कुछ करेगी, यह मान लेना भोलापन ही है। दुनिया के ताकतवर देश पाकिस्तान को इसलिए साधते हैं कि उसकी भू-सामरिक स्थिति बहुत मजबूत है। अमेरिका को ईरान व अफगानिस्तान पर नजर रखने के लिए पाकिस्तान की जरूरत है, इसलिए बराक ओबामा के जाने और डोनाल्ड ट्रंप के आने से भी कुछ नहीं बदला है। चीन को पाकिस्तान की जरूरत हमें घेरने एवं उसके भू-भाग का इस्तेमाल करते हुए अफ्रीका महाद्वीप जाने के लिए है, इस कारण वह भी उसके साथ मजबूती से खड़ा हुआ है। उसने काश्गर-ग्वादर गलियारा लगभग बना ही लिया है, जो उसे अफ्रीकी महाद्वीप से जोड़ता है। इस गलियारे का उपयोग सामरिक नजरिए से भी किया जा सकता है, हमारे खिलाफ। इस स्थिति में चीन पाकिस्तान के विरुद्ध क्यों बोलेगा? हमारा पक्ष वह इसलिए भी नहीं लेगा, क्योंकि हम उसके प्रतिद्वंद्वी हैं। एक समय रूस तो हमारे पक्ष में था, लेकिन वह भी पाकिस्तान का महत्व समझ गया है और उसकी ओर झुकता चला जा रहा है। ऐसे में दुर्रानी ने कुछ भी कहा हो, उससे पाकिस्तान की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहां भारत के खिलाफ षड्यंत्र होते रहे हैं, आगे भी होते रहेंगे।

हरिशंकर द्विवेदी (सामरिक मामलों के जानकार)

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