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संपादकीय

रोकना ही पड़ेगा चरमपंथ का फैलाव

By Raj Express | Publish Date: 3/9/2017 9:15:53 AM
रोकना ही पड़ेगा चरमपंथ का फैलाव
जिस प्रकार दुनिया में कहीं कोई आतंकवादी हमला होता है, तो उसके तार पाकिस्तान से जरूर जुड़ते हैं, वहां के किसी न किसी संगठन की आतंकवादियों से मिलीभगत पायी ही जाती है, उसी तरह हमारे यहां जब कोई वारदात होती है तो या तो उसके पीछे पाकिस्तान ही होता है और अगर वह नहीं हुआ तो फिर उसके तार या तो हैदराबाद से जुड़ते हैं या पश्चिम बंगाल या फिर उत्तरप्रदेश से। कभी-कभी यह तार केरल से भी जा जुड़ते हैं और कश्मीर से भी। मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में एक पैसेंजर रेलगाड़ी में धमाका हुआ, जिसके बारे में सामने आया है कि वह दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएस के आतंकियों के द्वारा अंजाम दिया गया है, लेकिन उसके तार उत्तरप्रदेश से जुड़ने लगे हैं। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक इस मामले में छह लोगों को पकड़ा जा चुका था। तीन संदिग्ध मध्यप्रदेश के पिपरिया और दो उत्तरप्रदेश के कानपुर से पकड़े गए हैं, जबकि एक संदिग्ध को इटावा से पकड़ा गया है। ये सभी के सभी उत्तरप्रदेश के हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जो संदिग्ध मारा गया है, वह भी वहीं का है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या वजह है कि देश का सबसे बड़ा राज्य आतंकवादियों को अपने लिए मुफीद लगता है। हालांकि, फिलहाल किसी दूसरे राज्य से इस मामले में एक भी संदिग्ध नहीं पकड़ा गया है, लेकिन इस सवाल को थोड़ा विस्तार तो देना होगा। उसे उत्तरप्रदेश तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि यह पूछना होगा कि वजह क्या है कि इस प्रदेश के साथ ही साथ आतंकवादी पश्चिम बंगाल, केरल व आंध्रप्रदेश के हैदराबाद को अपने लिए मुफीद मानते हैं? पिछले डेढ़-दो वर्षो में हमारे देश में आईएस के लिए काम करने के आरोप में सवा सैकड़ा से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें कुछ गिरफ्तारियां हमारे देश में हुई हैं, तो कुछ संयुक्त अरब अमीरात में भी। इनमें से अगर हम पुणो की उस किशोरी को छोड़ दें, जो कि दिसंबर-2015 में महाराष्ट्र एटीएस की नजर में आई थी व जिसकी बाद में काउंसिलिंग कर उसे सही रास्ते पर लाया गया था, तो जितनी भी गिरफ्तारियां होती रही हैं, वे सभी संदिग्ध उन्हीं स्थानों के थे, जिनकी चर्चा ऊपर हो चुकी है। जुलाई-2015 में मुंबई के जिन तीन युवकों के बारे में पता चला था कि वे आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया जा चुके हैं, उनके पूर्वज केरल से मुंबई आकर बसे थे। आईएस का बेंगलुरु से जो ट्वीटर हैंडलर गिरफ्तार किया गया था, उसका नाम था, मेहदी मसरूर विस्वास और वह पश्चिम बंगाल का था। वह दिसंबर-2014 में गिरफ्तार किया गया था, एक ब्रिटिश समाचार चैनल की सूचना पर। बताते चलें कि यह हमारे देश में आईएस के किसी संदिग्ध की पहली गिरफ्तारी थी। उसके बाद तो अनेक गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें से कुछ को काउंसिलिंग के बाद छोड़ा गया है, तो कुछ जेल में हैं। इस तरह के जो लोग पकड़े नहीं गए, वे सीरिया और इराक जाकर आईएस में भर्ती हो गए थे। इनमें से कुछ आतंकी मारे गए हैं, कुछ जिंदा हैं। अभी हाल ही में अफगानिस्तान में भी आईएस का एक आतंकी मारा गया है, जो केरल का था। कहानी यह है कि केरल के बहुत सारे युवक अरब देशों में नौकरी करने जाते हैं। अगर हम संयुक्त अरब अमीरात को छोड़ दें, जो उन्नति के मामले में अमेरिका को टक्कर देने लगा है तो बाकी सभी अरब देशों में कट्टरता है। केरल के युवक कट्टर वहीं होते हैं और फिर आईएस के समर्थक बन जाते हैं। शेष कसर वह मदरसे पूरी करते हैं, जो केरल में जगह-जगह चल रहे हैं। यह सही है कि सभी मदरसे कट्टरता का पाठ नहीं पढ़ाते, मगर केरल, हैदराबाद, पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश एवं उत्तरप्रदेश की नेपाल से लगी सीमा के इलाकों में ऐसे मदरसों की तादाद सैकड़ों में हो सकती है, जो कट्टरता का पाठ पढ़ा रहे हैं। हाल ही में जब गोरक्ष पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ ने इन पर सवाल उठाया था, तब इसे उनका चुनावी शिगूफा कहकर खारिज कर दिया गया था। हो सकता है कि योगी की मंशा चुनावी लाभ लेने की ही हो, लेकिन उत्तरप्रदेश, केरल, हैदराबाद में ऐसे अनेक मदरसे हैं, जो कट्टरता का पाठ पढ़ाते हैं। यहां प्रश्न उठाया जा सकता है कि आईएस के लिए काम करने के आरोप में जिन लोगों को पकड़ा जाता है, उन में से ज्यादातर तो उच्च शिक्षित होते हैं, उन्हें कंप्यूटर एवं अंग्रेजी का ज्ञान होता है, तो उनका मदरसों से क्या लेना-देना है? लेकिन यह सवाल सही नहीं है। ये मदरसे ऐसी सामग्री बांटते हैं, जिसके जरिए युवा इतने कट्टर हो जाते हैं कि उन्हें आईएस ही सच्चा इस्लामी संगठन प्रतीत होने लगता है। इसमें कोई शक नहीं है कि मुस्लिम धर्मगुरु इस मामले में बहुत शानदार भूमिका निभा रहे हैं। वे इस तरह की कोशिशें लगातार करते हैं, जिससे आईएस युवाओं को बरगला न सके। इसके बावजूद कुछ मदरसों की जो भूमिका है, वह ठीक नहीं है। ये लोगों में कट्टरता का पौधा रोपते हैं और बाकी खाद पानी उन्हें इंटरनेट से मिल जाता है। जब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया जाएगा, कट्टरता फैलती रहेगी व हमारे कुछ युवा आईएस के झांसे में भी आते रहेंगे। मध्यप्रदेश की घटना के बाद हम समस्या की गंभीरता को समझें और उसे सुलझाएं।
प्रो. सतीश कुमार
(शिक्षाविद् और समाजशास्त्री)
 
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