• 14 साल की लड़की को बंधक बना 1000 लोगों से बनवाया शारीरिक संबंध
  • प्रशांत भूषण को पीटने वाले को बीजेपी ने बनाया प्रवक्ता
  • राजस्थान: लैंडिंग से पहले बाड़मेर में क्रैश हुआ सुखोई, दोनों पायलट सुरक्षित
  • 'लालू परिवार' हुआ रघुवंश से नाराज, राबड़ी ने बयान को बोला फूहड़
  • गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पांचवां प्रांत घोषित करने की तैयारी में पाकिस्तान
  • सिद्धू को मिल सकता है कांग्रेस से झटका, अमरिंदर नहीं चाहते कोई डिप्टी CM
  • लोकसभा में भाजपा सांसदों ने किया पीएम मोदी का स्वागत, लगे 'जयश्री राम' के नारे
  • पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी में फूट के आसार!

होम |

संपादकीय

संभव हो सकता है असंभव कार्य

By Raj Express | Publish Date: 3/11/2017 11:30:43 AM
संभव हो सकता है असंभव कार्य
एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद उत्तरप्रदेश में एक अलग तरह की राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है और यदि मतगणना के परिणाम एग्जिट पोल के नतीजों से मेल खाते हैं तो वह प्रयास किया भी जा सकता है, जिसके कयास लगाए जा रहे हैं। कयास तब शुरू हुए, जब अखिलेश यादव ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उत्तरप्रदेश की सत्ता को भाजपा रिमोट कंट्रोल के माध्यम से चलाए। इसका अर्थ यह निकाला गया कि अखिलेश को विधानसभा त्रिशंकु होने की आशंका है एवं इस स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार राज्यपाल के जरिए उत्तरप्रदेश पर शासन करेगी। तब तक, जब तक कि राज्य में कोई सरकार बनेगी नहीं। मजे की बात यह है कि अखिलेश ने जो कहा, उसका भावार्थ भी लोगों ने निकाल डाला। अटकल चल रही है कि अगर राज्य की विधानसभा त्रिशंकु हो गई तो समाजवादी पार्टी अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी से भी हाथ मिला सकती है। यूं तो यह संभव नहीं लगता। वर्ष-1993 में इन दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हुआ था, मगर बाद में वह अप्रिय प्रसंग बन गया। एक ऐसा अप्रिय प्रसंग, जिसे मायावती याद तक नहीं करना चाहती होंगी। हुआ यह था कि भाजपा को सत्ता से उखाड़ने के लिए वर्ष-1993 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा में न केवल गठबंधन हो गया, बल्कि इसे बहुमत भी मिल गया। मगर बाद में मुलायम सिंह यादव और मायावती के बीच अहंकारों का टकराव शुरू हो गया। इसका नतीजा यह हुआ कि दो जून-1995 को बसपा ने मुलायम सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। तब पहले तो मायावती को समझाने की कोशिश हुई, कहते हैं कि फिर उन्हें धमकाया भी गया और वे जब मानी नहीं, तो कहा जाता है कि समाजवादी पार्टी के दो-तीन नेताओं के नेतृत्व में सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उस गेस्ट हाउस पर धावा बोल लिया, जो लखनऊ के मीराबाई रोड पर है और जिसके कमरा नंबर-1 में मायावती अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं। कहा जाता है कि उस दिन उनके साथ बहुत अभद्रता की गई थी व भाजपा के स्वर्गीय दबंग नेता ब्रादत्त द्विवेदी अगर मौके पर नहीं पहुंचते तो कुछ भी हो सकता था। मायावती इस घटना को अभी तक नहीं भूली हैं। कभी भूलेंगी भी नहीं। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जब लालू प्रसाद यादव ने उनसे सपा के साथ आने को कहा था, तो उन्होंने उन्हें गेस्ट हाउस कांड की याद दिला दी थी। लेकिन अब जानकारों का कहना है कि यदि उत्तरप्रदेश विधानसभा त्रिशंकु होती है तो सपा-बसपा साथ आ भी सकते हैं। इसका पहला कारण तो यही है कि कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ ममता बनर्जी और लालू यादव दोनों दलों को साथ लाने के लिए अभी से सक्रिय बताए जाते हैं। इसका दूसरा कारण यह है कि सपा अब अखिलेश यादव की है और गेस्ट हाउस कांड के प्रमुख खलनायक बताए जाते रहे शिवपाल यादव से उनकी जरा भी नहीं बनती। तब संभव है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में मायावती अपने रुख को बदलें और सपा के साथ चल पड़ें।  
Contact us: contact@rajexpress.com
Copyright © 2016 RajExpress.com. All Rights Reserved.
Designed by : 4C Plus