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संपादकीय

प्रचंड चुनौतियां लेकर आई जीत

By Raj Express | Publish Date: 3/14/2017 4:56:34 PM
प्रचंड चुनौतियां लेकर आई जीत
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में भाजपा के लिए सबसे ज्यादा खास उत्तरप्रदेश रहा, जहां उसने विधानसभा की 403 में से 312 सीटें जीत ली हैं। वैसे उत्तराखंड के नतीजों को भी भाजपा के लिए खास माना जा सकता है, लेकिन वहां ये वैसे ही आए हैं, जैसे की उम्मीद थी। अलबत्ता, उत्तरप्रदेश के नतीजे जैसे आए हैं, उस तरह की उम्मीद तो खुद भाजपा को भी नहीं रही होगी। कारण यही है कि अब उसकी जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। इस राज्य में भाजपा को जो प्रचंड जीत मिली है, उसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है। ये दोनों नेता राज्य की जनता का वह भरोसा बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं, जो उसने 2014 के लोकसभा चुनाव में इन पर जताया था। अत: इनकी भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। राज्य में भाजपा की जो सरकार बनेगी, उसे जनता की कसौटियों पर खरा उतारने की पूरी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष की ही होगी। इन्हें अपनी सरकार के कामकाज पर नजर रखनी पड़ेगी। उधर, उस सरकार की चुनौतियां तो स्पष्ट हैं ही। सपा गई और बसपा आई, बसपा गई तो सपा आई, इस चक्कर में सबसे ज्यादा कबाड़ा राज्य की नौकरशाही का हुआ है। पिछले 15 वर्षो में इन दोनों ही दलों ने अफसरशाही को अपने-अपने रंग में रंगने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अत: वह आम जनता के प्रति कम, जबकि अपने राजनीतिक आकाओं के प्रति ज्यादा जवाबदेह होती चली गई। यही हाल निचले स्तर के प्रशासन का ही नहीं हुआ, बल्कि पूरे प्रशासन तंत्र का भी हो गया। लेखपाल और पुलिस कर्मचारी तो ठीक, अध्यापकों की राजनीतिक निष्ठाएं भी छिपाने से नहीं छिपतीं। लिहाजा, देश का सबसे बड़ा सूबा 15 वर्ष पहले जहां था, वहां आज नहीं है, जबकि इस अवधि में कई राज्यों ने जबर्दस्त तरक्की कर ली है। मिसाल के लिए दूर क्यों जाएं, अपना मध्यप्रदेश भी आठ-दस साल पहले बीमारू कहा जाता था, मगर अब यह बात कोई नहीं कह सकता। हमारे प्रदेश ने जो तरक्की की है, वह स्वत: दिख जाती है। दूसरी ओर उत्तरप्रदेश है, जो कि अपराधों में अव्वल हो चुका है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने दो वर्ष पहले बताया था कि इस राज्य की पुलिस अगर सभी अपराधों को दर्ज करने लगे तो फिर उत्तरप्रदेश से ज्यादा अपराध कहीं नहीं होते। विकास का हाल यह है कि एक तरफ मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड सज रहा है, संवर रहा है, तो दूसरी ओर उत्तरप्रदेश का बुंदेलखंड वह इलाका बन गया है, जिसने रोजी-रोटी के लिए पलायन के मामले में उड़ीसा को भी पीछे छोड़ दिया है। पूर्वाचल और पश्चिमी उत्तरप्रदेश की कहानी भी इससे अलग नहीं है। चूंकि जातिवादी एवं सांप्रदायिक ताकतों को संरक्षण मिला है, इसलिए सामाजिक ताना-बाना भी बुरी तरह छिन्न-भिन्न हुआ है। उत्तरप्रदेश की नई सरकार को एक ओर तो सामाजिक ताना-बाना सुधारना होगा, अपराधों पर अंकुश लगाना होगा, तो दूसरी तरफ विकास की गंगा को बहाना होगा। यानी, भाजपा को राज्य में जो प्रचंड विजय मिली है, उसमें प्रचंड चुनौतियां भी निहित हैं।
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