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संपादकीय

कांग्रेस के लिए सबक है गोवा

By Raj Express | Publish Date: 3/15/2017 11:33:00 AM
कांग्रेस के लिए सबक है गोवा
सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के मुख्यमंत्री पद के लिए मनोहर पर्रिकर के शपथ ग्रहण पर रोक न लगाकर ठीक ही किया है। हालांकि, उसने उन्हें 16 मार्च को 11 बजे विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने का निर्देश दिया है, मगर इसे भाजपा के लिए झटका मानना सही नहीं होगा। मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री के पद से हटाकर गोवा का मुख्यमंत्री बनाया ही इसलिए गया है कि अपने राज्य की पूरी ही राजनीति और वहां के राजनीतिक मिजाज से वे अच्छी तरह से वाकिफ हैं। यदि उनके पास बहुमत नहीं होता तो वे सरकार बनाने का दावा ही राज्यपाल के समक्ष पेश नहीं करते। यदि भाजपा को उनकी क्षमताओं पर भरोसा नहीं होता तो वह भी उन्हें वहां भेजती नहीं। इसलिए उनके बहुमत साबित करने में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि गोवा फारवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर ही दी है, तो उनसे पहले महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी भी पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है। यानी, जल्दी में ही सही, पर्रिकर बहुमत साबित कर देंगे।
वैसे भी उनका रास्ता सबसे ज्यादा तो कांग्रेस ने आसान किया है। इस पार्टी ने गोवा की 40 में से 17 विधानसभा सीटें जीती हैं। यानी, उसका संख्याबल भाजपा से ज्यादा है, जिसने 13 सीटों पर जीत हासिल की है। लेकिन कांग्रेस ने यह रणनीतिक गलती की है कि उसने राज्यपाल के पास जाकर अपनी सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। न उन्हें यह बताया कि कौन सी पार्टी के विधायक उसे समर्थन देने जा रहे हैं। उसे जाना चाहिए था राज्यपाल के पास, पर वह सुप्रीम कोर्ट चली गई, यह मांग करती हुई कि नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण रोक दिया जाए। दिलचस्प यह है कि वह यह बात कोर्ट को भी नहीं बता पाई कि वह शपथ ग्रहण क्यों रुकवाना चाह रही है? लिहाजा, उसने उसकी बात सुनी नहीं और मनोहर पर्रिकर को शपथ लेने से रोकने से इंकार कर दिया। देश की सबसे पुरानी पार्टी यह रणनीतिक गलती कैसे कर सकती है, यह समझना जरा कठिन है? अत: वह कोर्ट के प्रश्नों का उत्तर भी नहीं दे पाई।
यह हो सकता है कि कांग्रेस को राज्यपाल पर भरोसा न रहा हो, लेकिन चूंकि इस पद पर बैठे हुए लोग राज्यों के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, इसलिए उनकी अवहेलना की कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं होती है। कांग्रेस ने गोवा के राज्यपाल के समक्ष अपनी बात ही नहीं रखी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अवहेलना माना। यदि वह राज्यपाल के पास जाती और उनके द्वारा उसकी बात नहीं सुनी जाती, तब ही उसे न्यायपालिका की शरण में जाना चाहिए था। लेकिन उसने तो शुरुआत ही सुप्रीम कोर्ट से की, जिससे मनोहर पर्रिकर का रास्ता थोड़ा और आसान हो गया और कांग्रेस चुनाव में पहले नंबर की पार्टी बनकर भी अपनी गलतियों के कारण सरकार बनाने से वंचित हो गई। अब गोवा में भाजपा की सरकार एक तरह से बन ही चुकी है। पर्रिकर बहुमत भी साबित कर लेंगे, पर इससे कांग्रेस को जो सबक मिला, वह उसे आगे के लिए याद रखे।  
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