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संपादकीय

देश नाहिद आफरीन के साथ है

By Raj Express | Publish Date: 3/17/2017 11:19:58 AM
देश नाहिद आफरीन के साथ है
आज भले ही हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हों, चांद पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हों,  मगर दूसरा सच यह है कि पूरी दुनिया में धार्मिक कट्टरता बढ़ती चली जा रही है। कहने में यह बात बुरी लग सकती है, मगर मुस्लिमों में अपने धर्म के प्रति कुछ ज्यादा ही कट्टरता है। कारण यही है कि उन्हें देख-देखकर दूसरे समुदाय भी कट्टर होते चले जा रहे हैं। यह सही है कि कम से कम हमारे देश के सभी मुस्लिम कट्टरपंथी नहीं हैं, लेकिन जो कट्टर हैं, उनकी संकुचित और संकीर्ण मानसिकता के कारण पूरे देश को अपनी आवाज के जादू से दीवाना बना देने वाली असम की 16 वर्षीय युवा गायिका नाहिद आफरीन को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उससे कहा जा रहा है कि वह गाना बंद करे, क्योंकि यह शरीयत के खिलाफ होता है। यह सुन कर कोई भी हतप्रभ हो जाएगा कि एक मासूम के खिलाफ इन मौलवियों ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि ताबड़तोड़ 46 फतवे जारी कर उसे स्टेज पर गाने से मना कर दिया है। इसके पीछे तर्क यही है कि गाना शरीयत के खिलाफ होता है, लेकिन मिसाल देनी होगी उस आफरीन की, जिसने इन फतवों को धता बताते हुए मरते दम तक गाने की कसम खाई है। इसी तरह की दृढ़ता ही उस कट्टरता को जवाब दे सकती है, जो अब हमारे समाज में बढ़ती चली जा रही है। हैरत की बात यह है कि स्वयं को प्रगतिशील बताने वाले लोग इस कट्टरता का विरोध नहीं करते और अगर करते भी हैं, तो बहुत ही दबी हुई जुबान में। इसकी वजह शायद यह है कि वे भी कट्टरपंथियों से भयभीत रहते हैं।
जो भी हो, मगर उल्लेखनीय यह है कि बुधवार को असम के 46 संगठनों-मौलवियों ने नाहिद आफरीन के कार्यक्रम का स्थल मस्जिद और कब्रिस्तान के पास होने के कारण फतवा जारी किया है। मध्य असम के लंका और होजाई इलाकों में इन संगठनों की ओर से पर्चे भी बांटे गए हैं, जिन पर इनके हस्ताक्षर हैं। इनमें लिखा है कि जादू, नृत्य, नाटक, थियेटर आदि शरीयत के सख्त खिलाफ हैं। संगीत समारोह जैसे सभी कार्यक्रम भी शरीयत के खिलाफ हैं। अगर इन कार्यक्रमों को रोका नहीं गया तो भावी पीढ़ी भ्रष्ट हो जाएगी। वह धर्म से विमुख होती चली जाएगी। मुस्लिमों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए, जो कि उनके मजहब के खिलाफ हो। बता दें कि नाहिद आफरीन 25 मार्च को उदाली में एक स्टेज शो करने वाली हैं। बताया जाता है कि इस शो में वह आतंकवादी संगठनों के खिलाफ गाएगी। शायद इसीलिए कई संगठनों ने फतवा जारी कर उसे इससे दूर रहने को कहा है। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि इससे न केवल उसकी प्रतिभा पर बुरा असर पड़ेगा, वरन् वह संगीत से भी वंचित हो जाएगी। गौरतलब है कि नाहिद आफरीन बहुत प्रतिभाशाली है। वह वर्ष-2015 में इंडियन आयडल जूनियर की उपविजेता रही थी। उसे फिल्मी दुनिया में भी ब्रेक मिला। आफरीन ने वर्ष-2016 में अकीरा फिल्म के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा था। इसमें उसने सोनाक्षी सिन्हा के लिए गीत गाए थे। तब फिल्म समीक्षकों और आलोचकों ने उसकी आवाज, गाने के अंदाज और प्रतिभा की जमकर तारीफ की थी, पर समय—समय पर हमारे देश में कुछ कट्टरपंथियों का धड़ा अपने  फन फुलाकर खड़ा हो जाता है और अपनी दकियानूसी सोच के तले नई-नई प्रतिभाओं को रौंदने की नाकाम कोशिश करता है।
बहरहाल, नाहिद आफरीन आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। बेखौफ, बेबाक आफरीन ने फतवे जारी करने वालों को करारा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह इनसे डरने वाली नहीं है। विवाद के कारण उसकी लोकप्रियता भी बढ़ी है। जिस नाहिद आफरीन का नाम हम भूलने से लगे थे, वह अब देशभर में चर्चा पाने लगा है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और कई मुस्लिम गायकों ने नाहिद को संगीत न छोड़ने की प्रेरणा दी व उसकी हौसला अफजाई की है। असम सरकार ने उसे पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का वादा किया है। सर्वानंद सोनोवाल ने कहा-कलाकारों की स्वतंत्रता लोकतंत्र का सार है। मैंने नाहिद से बात करके उसे और सभी कलाकारों को पूरी सुरक्षा देने की सरकार की वचनबद्धता से अवगत करा दिया है। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा-मैं पूरी तरह से आफरीन के साथ हूं। उन्हें गाने का पूरा अधिकार है। हमें उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संज्ञान तक भी यह मामला जा पहुंचा है। उन्होंने वादा किया है कि आफरीन को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। उधर, इस विवाद के बाद से असम के कई संगठन और लोग भी आफरीन के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता उसे पूरी सुरक्षा देगी। वहीं, पुलिस ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि ये फतवे आफरीन द्वारा हाल ही में आतंकियों, खासकर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ गाए गए गीत की प्रतिक्रिया में तो कहीं जारी नहीं किए गए हैं। कुल मिलाकर इस विवाद के बाद से नाहिद के चाहने वालों की फेहरिस्त और भी लंबी हो गई है। पूरा देश उसके साथ खड़ा हो गया है।
यह जरूरी भी है, क्योंकि हमारे देश में आज हर क्षेत्र में महिलाओं का दबदबा है। राजनीति, खेल अंतरिक्ष, अभिनय, अर्थ जगत में आज जहां नारी का सिक्का चलता है, वहीं एक मासूम को उसकी कला से महरूम करने के लिए फतवे पर फतवे जारी किए जा रहे हैं। क्या नाहिद के गाने से किसी की भावनाएं आहत हो जाएंगी या फिर किसी कानून का उल्लंघन हो जाएगा? क्या फतवे जारी करने वाले बताएंगे कि उनके धर्म की किस किताब में लिखा है कि नृत्य, नाटक, थियेटर आदि गलत हैं, गैर-मजहबी हैं? इन्हें बताना चाहिए कि अगर गाना गैर-मजहबी है तो स्व. मोहम्मद रफी के खिलाफ कभी कोई बात क्यों नहीं हुई? देश-दुनिया में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जो मुस्लिम होकर भी गाते हैं। भला हम बड़े गुलाम अली, मेहदी हसन, शमशाद बेगम आदि महान गायकों को कैसे भूल सकते हैं? फतवे में कहा गया है कि थियेटर भी गैर-मजहबी है, मगर सच यह है कि दिलीप कुमार, शाहरुख खान व सलमान खान के खिलाफ कभी कोई आवाज नहीं उठी। अत: प्रश्न यही है कि अब महिलाओं की काबिलियत पर आखिर क्यों फतवे का रोड़ा अटका दिया जाता है? आखिर क्यों भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उन्हें अपनी प्रतिभाओं की बलि देने को मजबूर होना पड़ता है? हालांकि, अब यह भी कहा जाने लगा है कि नाहिद के खिलाफ फतवा नहीं दिया गया, केवल यही कहा गया कि वह गाए न, लेकिन यह भी क्यों कहा गया है? खैर, देश की बहादुर बेटी नाहिद आफरीन को ऐसी धमकियों को नजरअंदाज करके गाते रहना होगा। नाहिद! तुम्हारी आवाज खुदा की देन है, इसे कुछ मौलवियों के फतवे की भेंट नहीं चढ़ने देना। यह देश भी तुम्हारे साथ है, इसलिए खूब गाओ और नाम कमाओ।
सुनीता मिश्रा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)  
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