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संपादकीय

सच बोलकर फंस गए ख्वाजा आसिफ..

By Raj Express | Publish Date: 2/23/2017 4:14:04 PM
सच बोलकर फंस गए ख्वाजा आसिफ..

 पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बुरी तरह से घिर गए हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में म्यूनिख(जर्मनी)में हुए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि हाफिज सईद पाकिस्तान के लिए खतरा बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि दुनिया जिन लोगों को आतंकी कहती है,वे सभी के सभी खराब नहीं हैं, उनमें से बहुत से ऐसे भी हैं,जो खराब परिस्थितियों के कारण आतंकवाद की राह पर चल पड़े हैं। लेकिन ख्वाजा ने कुछ आतंकवादियों को मानवता के लिए खराब भी बताया है और कहा कि हाफिज सईद खराब आतंकवादी ही है। उससे दुनिया को कम, जबकि पाकिस्तान को कुछ अधिक खतरा है। उनके इस सही बयान ने उन्हें परेशानी में डाल दिया है। नवाज शरीफ सरकार के इमरान खान जैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ही नहीं,बल्कि सभी राजनीतिज्ञ तक ख्वाजा का विरोध कर रहे हैं। करीब-करीब सभी धार्मिक संगठन ख्वाजा के विरोध में हैं। आतंकवादी संगठन बौखला गए हैं, तो मीडिया का एक धड़ा उनके बारे में कह रहा है कि वे भारत के भोंपू बन गए हैं,तो दूसरा धड़ा इसके लिए नवाज शरीफ को लपेटे में ले रहा है। उसका निष्कर्ष है कि ख्वाजा से यह बयान नवाज ने दिलाया,ट्रंप को खुश करने के लिए। जिन लोगों ने ख्वाजा के खिलाफ तगड़ा मोर्चा खोल दिया है,उनमें शामिल हैं,पाकिस्तान की सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष मौलाना समीउल हक,बलूचिस्तान के कट्टरपंथी नेता शाह बुगती,सांसद लियाकत बलूच,सीनेटर मोहम्मद अली दुर्रानी और मियां महमूद उर रशीद, पंजाब विधानसभा में नवाज शरीफ की पार्टी‘मुस्लिम लीग नवाज’ के विधायक सरदार अतीक खान व सरदार लतीफ अहमद खोसा,पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सीनेटर मियां जमशेद अहमद दश्ती एवं हाफिज हमदुल्लाह और पूर्व सेना प्रमुख राहील शरीफ के करीबी माने जाने वाले हाफिज अब्दुल रोपारी। यदि हम इस सूची को गौर से देखें तो पाएंगे कि इसमें संपूर्ण पाकिस्तान की लगभग सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हैं,तो सभी बड़े सुन्नी धर्मगुरु तो ख्वाजा आसिफ का विरोध कर ही रहे हैं। तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी को लगता है कि वह ख्वाजा का विरोध कर के कट्टरपंथी ताकतों को अपनी तरफ झुका सकती है। अत: उसने नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ अभियान चलाने की भी तैयारी कर ली है, जबकि जमीयत-ए-इस्लामी पाकिस्तान देशभर में विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। कुल मिलाकर पाकिस्तान की सभी ताकतें ख्वाजा के विरोध में लामबंद होने लगी हैं,जो यह नहीं चाहतीं कि पाकिस्तान आधुनिक दुनिया के साथ अपने कदम मिलाकर चले। ये सभी वे ताकतें हैं,जो पाकिस्तान को कट्टरता की हद तक धार्मिक देश बनाए रखना चाहती हैं। ऐसा देश,जहां न तो धार्मिक अल्पसंख्यकों को कोई अधिकार मिलना चाहिए,न ही महिलाओं को। कारण यही है कि ख्वाजा ने जो कहा है,उनकी बात सही होने के बावजूद उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा है।

मगर,सबसे ज्यादा सवालों के दायरे में नवाज शरीफ सरकार है। कायदे से उसे अपने मंत्री के बचाव में खुलकर आना चाहिए था। आखिर,जिस सरकार ने हाफिज सईद को नजरबंद कर दिया है,जिसने उसे आतंकवादी मान लिया है,वह अपने एक मंत्री का बचाव क्यों नहीं कर रही है?हालांकि,इसका कारण भी साफ है। दरअसल,हाफिज सईद सेना का दुलारा है। उसने ही उसको एक छोटे से धर्मगुरु से बड़ा आतंकवादी बनाया है। फिलहाल तो वह इतना बड़ा आतंकी सरगना बन गया है कि पाकिस्तान के लगभग सभी आतंकी संगठन तो उसे सम्मान की नजर से देखते ही हैं,तो उधर अफगानिस्तान के आतंकी समूह और इधर जम्मू कश्मीर के अलगाववादी भी उसका सम्मान करते हैं। पाकिस्तानी फौज उसे किस प्रकार पसंद करती है,इसका अंदाजा हमें उस बयान से हो जाना चाहिए,जो हाल ही में परवेज मुशर्रफ ने दिया था। उन्होंने दुबई में कहा था कि हाफिज सईद आतंकवादी नहीं,बल्कि वह तो एक‘समाज सुधारक’है। याद रखिए,पाकिस्तान की सेना पर अब भी मुशर्रफ की छाप है। उनके बाद के दोनों सेना प्रमुख यानी जनरल अशफाक परवेज कियानी व जनरल राहील शरीफ उनके ही करीबी रहे हैं। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बारे में भी यही माना जाता है कि वे मुशर्रफ के शिष्य हैं।
मतलब,उन्होंने हाफिज सईद के बारे में जो कहा है,उसे फौज का दृष्टिकोण माना जाना चाहिए। ऐसे में नवाज शरीफ तेल देख रहे हैं एवं उसकी धार। उनकी सरकार में हिम्मत ही नहीं है कि वह ख्वाजा के बचाव में उतरे। जो सरकार अपने एक स्पष्टवादी मंत्री का बचाव नहीं कर पा रही है,वह आतंकवाद से क्या लड़ेगी?यूं लगता यह भी है कि ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका को खुश करने के लिए ही हाफिज सईद के विरोध में बयान दिया होगा,वरना तो वे भी कोई समझदार आदमी नहीं हैं। ये वही ख्वाजा आसिफ हैं,जो भारत को पिछले नौ माह में तीन बार परमाणु बम की धमकी दे चुके हैं। जो भी हो,लेकिन अबकी बार वे सच बोलकर फंस गए हैं। वे पाकिस्तान के पहले बड़े नेता हैं,जिन्होंने हाफिज सईद के खिलाफ बोला है। इसीलिए उनकी परेशानियां बढ़ने लगी हैं।
 डॉ.डीबी कुंभज (अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार)
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