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संपादकीय

भारतीय पेशेवरों में दशहत लाजिमी

By Raj Express | Publish Date: 2/25/2017 12:56:10 PM
भारतीय पेशेवरों में दशहत लाजिमी

 अत्यंत सभ्य,लोकतांत्रिक एवं मानवाधिकारों के पैरोकार माने जाने वाले यूरोपीय देशों में रंग,नस्ल और धर्म आधारित भेदभाव की घटनाएं वैसे तो अकसर होती रहती हैं। आस्ट्रेलिया,अमेरिका व कनाडा जैसे देशों,जहां यूरोपीय समुदाय बहुमत में है,वहां भी ऐसी घटनाएं खूब होती हैं, लेकिन अमेरिका के कनसास में भारत के दो इंजीनियरों पर जिस तरह हमला किया गया और इस हमले में एक की तो मौत तक हो गई,उसे सिर्फ नस्लीय हमला मानना सही नहीं होगा। यह हमला मंदिरों,गुरुद्वारों,मस्जिदों पर होते रहे हमलों से अलग है। वे हमले धार्मिक कट्टरपंथी समूह करते रहे हैं,जबकि इंजीनियरों पर जो हमला हुआ है,उसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप की वह नीतियां हैं,जिन पर वे चलते दिख रहे हैं। अपने चुनाव अभियान के दौरान वे अमेरिकियों के एक बड़े वर्ग को यह समझाने में कामयाब रहे हैं कि वे इसलिए बेरोजगार हैं,क्योंकि विदेशियों ने अमेरिका में आकर उनकी नौकरियां छीन ली हैं। गलत नहीं है ट्रंप की बात। अमेरिका के30फीसदी से अधिक रोजगार विदेशियों के पास हैं,जिनमें भारतीय या भारतीय मूल के लोग अव्वल हैं। लेकिन इसकी जड़ें कहीं और हैं। नवउदारवादी आर्थिक नीतियों का सबसे बड़ा पैरोकार अमेरिका ही है। वैश्विक संस्थाओं पर उसका दबदबा है और उसने उन्हीं के माध्यम से पूरी ही दुनिया पर अपनी आर्थिक नीतियां थोप दी हैं। श्रम और पूंजी का एक से दूसरे देश में पलायन इन आर्थिक नीतियों का स्वाभाविक नतीजा है। पूंजीपतियों को जहां भी अपने निवेश पर बेहतरीन मुनाफा दिखता है,वे वहीं जाने लगे। युवाओं को रोजगार के जहां बेहतर अवसर दिखे,वे भी वहीं पहुंच गए। अमेरिका सबसे ज्यादा आकर्षक है,इसीलिए वहां पूंजी और श्रम भी ज्यादा पहुंचा। ऐसे में अमेरिकियों के रोजगार पर प्रभाव भी पड़ा होगा। लेकिन ट्रंप सिर्फ इसी प्रभाव की बात करते दिखते हैं। यह नहीं बताते कि जो आर्थिक नीतियां अमेरिका ने दुनिया पर थोपी हैं,इस प्रभाव की जड़ में वही हैं। उन नीतियों से पीछे हटने का भी उनका इरादा नहीं है,मगर वे विदेशी पेशेवरों को अमेरिका से खदेड़ देना चाहते हैं। उनके इन विचारों का असर अमेरिकियों पर भी पड़ा है। भारतीय इंजीनियरों पर हमला इसीलिए हुआ। हालांकि,ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि कनसास में मारे गए भारतीय इंजीनियर को न्याय मिलेगा। हम मानकर चलें कि ऐसा होगा भी,मगर उसकी जिंदगी तो वापस आने से रही। दुनिया में ऐसी कोई न्याय व्यवस्था नहीं है,जो मारे जा चुके किसी व्यक्ति की जिंदगी वापस कर दे। इस घटना के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीय लोगों के बीच दहशत का माहौल भी है। अत: हमारे कुछ पेशेवर अगर स्वदेश वापस आ जाएं तो इसमें भी हैरत नहीं होनी चाहिए। रास्ता यही है कि ट्रंप ने जो माहौल बनाया है,वे उसे ठीक करने का वादा करें। चूंकि अमेरिका में नफरत का माहौल उन्हीं ने बनाया है। अत: उसे ठीक भी उन्हें ही करना होगा। इस दुखद घटनाक्रम पर हमारा विदेश मंत्रालय जितनी तीखी प्रतिक्रिया दे सकता था,दे चुका है,जो कर सकता था,कर चुका है। इसके आगे की भूमिका ट्रंप निभाएं।

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