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स्वास्थ्य

स्लीप एप्नीआ और डायबिटीज में क्या है संबंध

By Raj Express | Publish Date: 2/27/2017 4:14:01 PM
स्लीप एप्नीआ और डायबिटीज में क्या है संबंध

स्लीप एप्नीआ एक तरह की ब्रीथिंग डिसऑर्डर है जिसमें सांस लेने में समस्या होती है। सांस लेने की समस्या खासकर रात को होती है। ये समस्या मधुमेह का शुरूआती लक्षण होता है। सांस की इस समस्या को होना मतलब आपके शरीर में धीरे-धीरे मधुमेह की समस्या हो रही है। स्लीप एप्नीआ पर अनगिनत शोध हो चुके हैं और उनमें इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि ये टाइप 2 डायबीटिज के खतरे को बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीप एप्नीआ के सारे साइड इफेक्ट सीधे तौर पर इंसान के मोटाबॉलिज्म से प्रभावित होते हैं। ये मेटाबॉलिज्म ही है जिस पर इंसान का स्वास्थ्य भी निर्भर करता है। मेटाबॉलिज्म और उससे प्रभावित होने वाले स्लीप एप्नीआ के बारे में जानें।  

क्या है स्लीप एप्नीआ

इस ब्रीथिंग डिसऑर्डर में इंसान सोते समय सांस लेना बंद कर देता है और कुछ देर के बाद फिर से सांस लेना शरू कर देता है। ये रुकावट कभी भी और कहीं भी सोने के दौरान होते हैं और सांस लेने में ये रुकावट कुछ सेकडस से कुछ मिनटों तक के लिए होती है। सांस लेने में ऐसी रुकावट एक घंटे में 30 या उससे अधिक बार तक हो सकती है। स्लीप एप्नीआ से पीडित मरीज रात में नियमित घंटों तक पूरी नींद लेने के बावजूद पूरे दिन थका रहता है। ऐसा रात में सही से ना सोने के कारण होता है। अधेड़ उम्र के एक-तिहाई इंसान स्लीप ऐप्नीआ से पीडित होते हैं। स्लीप एप्नीआ और डायबीटिज के बीच में परस्पर संबंध कई शोध में अच्छी तरह से साबित हो चुके हैं।

इन दोनों बीमारी (स्लीप एप्नीआ और डीयबीटिज) का सबसे बड़ा और पहला कारण है - मोटापा।

स्लीप एप्नीआ काफी खतरनाक हो सकता है क्योंकि ये शरीर के ब्लडस्ट्रीम के अंदर ऑक्सीजन के कॉन्सनट्रेशन को प्रभावित करता है।

ये स्लीप पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है जिसके कारण दिनभर थकावट रहती है।

इसका असर ब्लड शुगर पर पड़ता है। इसके अधिक समय तक रहने से ब्लड शुगर हाई हो जाता है और मेटाबॉलिज्म में अनिश्चितता आने से वजन बढ़ने लगता है।

अधिक समय तक हाई ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म के अनिश्चित रहने से शरीर में डायबीटिज की शुरुआत होने लगती है।

इसके खतरे

ये अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे स्लीप ऐप्नीआ से पीडित है। इसके बारे में तब ही पता चलता है जब मरीज को उसका पार्टनर उससे उसके खर्राटों की शिकायत करता है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, दिल की समस्या, अवसाद और कोलेस्ट्रॉल व शुगर की समस्या है तो स्लीप ऐप्नीआ आपके लिए काफी गंभीर और खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।  

ट्रीटमेंट- इसके ट्रीटमेंट में माउथपीस पहनना पड़ता है।

इसके अलावा ब्रीथिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जिसे कन्टिन्युअस पॉजी़टिव एयरवे प्रेसर कहते हैं।

सीवियर केस में सर्जरी की जाती है।

नोट- स्लीप एप्नीआ है इसका मतलब ये नहीं कि डायबीटिज है। लेकिन ये डायबीटिज की शुरुआत जरूर हो सकती है।

स्लीप एप्नीआ के लक्षण

याद्दाश्त का कमजोर होना

वजन बढ़ना

थकावट

गेस्टिक रिफल्क्स

ड्राय माउथ

खर्राटे लेना

हाई ब्लड प्रेशन

डायबीटिज

अवसाद

60 से अधिक आयु का होना

परिवार में किसी को स्लीप ऐप्नीआ हुआ हो

स्लीप एप्नीआ के प्रकार

ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एप्नीआ - ये बहुत ही सामान्य तरह का स्लीप एप्नीआ है। ऐसा सांस की नली के ब्लॉक होने के कारण होता है।

सेंट्रल स्लीप एप्नीआ - ये बहुत ही कम प्रचलित है। इस तरह का स्लीप एप्नीआ तब होता है जब दिमाग शरीर के मशल्स को सही तरीके से सांस लेने का सिग्नल नहीं भेज पाता। ऐसे में सांस नली सांस लेना बंद कर देती है।

स्लीप एप्नीआ के कारण

 मोटापा

सर्दी-जुकाम

साइनसाइटिस

अनियंत्रित टॉन्सिल

नियंत्रित ऐडिनॉइड

सांस नली का ब्लॉक होना

दिमाग से सांस नली की मांसपेसियों को सिग्नल ना मिलना

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