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स्वास्थ्य

खुशी से कराएं दिल का इलाज

By Raj Express | Publish Date: 3/14/2017 12:50:50 PM
खुशी से कराएं दिल का इलाज
खुशी से कराएं अपने दिल का इलाज बैलून एंजियोप्लास्टी और विभिन्न तरह के स्टेंट्स के विकास के कारण हृदय धमनियों में अवरोध को हटाने के लिए बाईपास सर्जरी की जरूरत समाप्त हो चुकी है.. आमतौर पर सीने में दर्द या भारीपन को लोग गैस का नाम दे देते हैं और इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। अधिकतर दिल के दौरे के आने से पहले कुछ लक्षण महूसस होते हैं। कई बार सिर्फ बेचैनी होती है, सीने में दर्द नहीं महसूस होता।
इसलिए पड़ता है दौरा
दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी एक या एक से अधिक धमनियों में जमे वसा के थक्के (क्लॉट्स) के कारण रुकावट आ जाती है। थक्के के कारण खून का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। खून नहीं मिलने से दिल की मांसपेशियों की गति रुक जाती है। अधिकांश मौतें दिल के दौरे में थक्के के फट जाने से होती हैं। ऐसा हार्ट अटैक, जिसके लक्षण अस्पष्ट हों या जिसका पता ही न चले, उसे साइलेंट हार्ट अटैक कहते हैं।
बाईपास सर्जरी नहीं
दिल के दौरे को टालने या दिल के दौरे के पड़ने पर मरीज की जान बचाने के लिए एक समय ऑपरेशन का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन बैलून एंजियोप्लास्टी और विभिन्न तरह के स्टेंट्स के विकास के कारण अब हृदय धमनियों में अवरोध (ब्लॉकेज) को हटाने के लिए हर मामले में बाईपास सर्जरी कराने की जरूरत नहीं है।
जब धमनी 100 प्रतिशत ब्लॉक्ड हो
कई बार जो धमनी 100 प्रतिशत तक बंद (ब्लॉक्ड) होती है, उसे खास तकनीक से खोला जाता है। जिन धमनियों में कैल्शियम जमा होता है, उन्हें डायमंड ड्रिलिंग तकनीक के जरिये खोला जाता है। इस तरह उन मरीजों को जो चीरफाड़ से डरे होते हैं, उन्हें बाईपास से बचाया जाता है। बहरहाल मैं पाठकों को यही सलाह देगे। कि जिन लोगों की तीनों धमनियों में अवरोध (ब्लॉकेज) हैं, तो उन्हें बाईपास सर्जरी को अहमियत देनी चाहिए, लेकिन जो लोग बाईपास नही कराना चाहते, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में धमनियों को स्टेंटिंग एंजियोप्लास्टी द्वारा खोला जा सकता है। ज्यादातर लोगों को हृदय की धमनियों में अवरोध या रुकावट का पता बहुत देर से लगता है। इस स्थिति से बचने के लिए हर व्यक्ति को 25 साल के बाद जनरल कार्डियक चेकअप कराना चाहिए।
स्टेंट वरदान से कम नहीं
स्टेंट हृदय रोगियों के लिए बहुत बड़ा वरदान है। ऐसा देखने में आया है कि कई बार हृदय धमनी में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा अवरोध होता है और इसके साथ ही साथ हार्ट अटैक भी जारी रहता है। ऐसे वक्त में एक अर्जेंट सिचुएशन पैदा हो जाती है और बाईपास सर्जरी की तैयारी करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में स्टेंटिंग से कुछ ही मिनटों में प्रमुख या मेन आर्टरी खोल दी जाती है और एक मरते हुए मरीज को नई जिंदगी मिल जाती है। मरीज और डॉक्टर का रिश्ता विश्वास की डोर से बंधा होता है। इस विश्वास को टूटना नहीं चाहिए। इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टर को जरूरत पड़ने पर ही स्टेंट डालना चाहिए। तकनीकों और कारगर उपचार विधियों की उपलब्धता के बावजूद हृदय रोगों से बचे रहने के लिए परहेज करना ही उचित है। नियमित व्यायाम करके, वजन पर नियंत्रण रखकर, धूम्रपान न करके, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखकर, कम नमक का सेवन करके और तनाव से दूर रहने से हृदय रोगों से एक हद तक बचना संभव है।
 
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