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लेख

रंग पंचमी पर रंगों में रमे होते हैं देवता

By Raj Express | Publish Date: 3/17/2017 4:35:47 PM
रंग पंचमी पर रंगों में रमे होते हैं देवता

रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो देश के कई क्षेत्रों में चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। दरअसल होली का जश्न कई दिनों तक चलता है और इसकी तैयारियां होली के दिन यानि फाल्गुन पूर्णिमा से लगभग एक महीने पहले शुरू हो जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा को होली का दहन के पश्चात अगले दिन सभी लोग उत्साह में भरकर रंगों से खेलते हैं। रंगों का यह उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है। इसलिये इसे रंग पंचमी कहा जाता है। रंग पंचमी कोकण क्षेत्र का खास त्यौहार है। महाराष्ट्र में तो होली को ही रंग पंचमी कहा जाता है। इसके पीछे की मान्यता यह है कि इस दिन जो भी रंग इस्तेमाल किये जाते हैं जिन्हें एक दूसरे पर लगाया जाता है। हवा में उड़ाया जाता है। उससे विभिन्न रंगों की ओर देवता आकर्षित होते हैं। साथ ही मान्यता है कि इससे ब्रह्मांड में सकारात्मक तंरगों का संयोग बनता है व रंग कणों में संबंधित देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है।

रंगपंचमी का महत्व

होली में होलिका नामक एक राक्षसी का नाश हुआ था। होलिका भक्त प्रलाहद की बुआ थी। उसने तपकर अग्नि से संरक्षण की सिद्धि प्राप्त की थी। भक्त प्रलाहद की भक्ति के सामने होलिका की सिद्धि असफ ल हो गई और वह जल गई। परंतु भक्त प्रलाहद बाल भी बांका नहीं हुआ। इसलिए उसमें सामथ्र्य अधिक था। उसे नष्ट होने में 5 दिन लगे। पूर्णिमा से लेकर चतुर्थी तक यानी 5 दिन तक उसका शरीर अग्नि में जलता रहा। छठे दिन प्रलाहद के बच जाने पर लोगों ने आनंदोत्सव मनाया। होलिका के जल जाने के कारण सर्वत्र राख यानी काला रंग तथा उसके कारण दुख व उदासीनता फैल गई। उसे नष्ट करने हेतु विभिन्न रंगों से सजी तथा रंगों के माध्यमसे अनुभूति प्रदान करनेवाली रंगपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। रंगपंचमी 2017 में अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 17 मार्च को है।

 
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