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संपादकीय

उत्तम व्यक्ति के लक्षण

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 11:22:08 AM
उत्तम व्यक्ति के लक्षण
एक बार की बात है, गौतम बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ एक शहर में प्रवास कर रहे थे। उनके वे शिष्य वह शहर घूमने निकले, तो लोगों ने उन्हें बहुत बुरा-भला कहा। वे क्रोध में भरकर बुद्ध के पास लौटे। बुद्ध ने पूछा, क्या बात है, आप सब तनाव में क्यों हैं। उनका एक शिष्य बोला, हमें यहां से तुरंत प्रस्थान कर देना चाहिए, क्योंकि वहां रहना उचित नहीं है, जहां पर हमारा सम्मान न हो। यहां तो लोग र्दुव्‍यवहार के सिवा कुछ जानते ही नहीं। इस पर बुद्ध मुस्कराकर बोले, क्या किसी और जगह पर तुम सद्व्यवहार की अपेक्षा करते हो? दूसरा शिष्य बोला, कम से कम यहां से तो भले लोग ही होंगे। बुद्ध बोले, किसी जगह को मात्र इसलिए छोड़ना गलत है कि वहां के लोग र्दुव्‍यवहार करते हैं। हम तो संत हैं। हमें तो कुछ  ऐसा करना चाहिए कि उस स्थान को तब तक न छोड़ें, जब तक वहां हर आदमी के व्यवहार को सुधार न दें। हमारे सही व्यवहार के बाद भी वे सौ बार र्दुव्‍यवहार करेंगे, लेकिन कब तक। आखिर में उन्हें सुधरना ही होगा व उत्तम प्राणी बनने का प्रयास करना ही होगा। संभवत: संतों का वास्तविक कर्म तो ऐसे ही लोगों को सुधारने का होता है। असली चुनौती तो विपरीत परिस्थितियों में खुद को साबित करना ही होती है। तब बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद ने पूछा, उत्तम व्यक्ति कौन होता है। इस पर बुद्ध ने जवाब दिया, जिस प्रकार युद्ध की ओर बढ़ता हुआ हाथी चारों तरफ के तीर सहते हुए भी आगे को चलता जाता है, ठीक उसी तरह उत्तम व्यक्ति भी दुष्टों के अपशब्दों को सहन करते हुए अपना कार्य करता चलता है। खुद को वश में करने वाले प्राणी से उत्तम कोई हो ही नहीं सकता। शिष्यों ने वहां से जाने का इरादा त्याग दिया। इसका परिणाम हुआ कि र्दुव्‍यवहार सद्व्यवहार में बदल गया।
बेला गर्ग
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