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संपादकीय

ट्रंप के दबाव में नाटक करते नवाज

By Raj Express | Publish Date: 3/21/2017 11:11:16 AM
ट्रंप के दबाव में नाटक करते नवाज
दुनिया की सियासी फिजां बदल सी रही है। इसे कट्टरता का उदार होना कहें या हालातों की मजबूरी, पर सच यही है कि भारत से अमेरिका तक सियासत पर जिस तरह से स्पष्ट धार्मिक रुझानों वाले लोकप्रिय नेताओं का कब्जा हुआ है, उसने अब तक के सबसे खुर्राट समझे जाने वाले कट्टरपंथी मजहबी देशों के नेताओं की नींद उड़ा दी है। अधिकांश खाड़ी देश तो पहले से ही अपनी सुरक्षा और व्यावसायिक हितों के चलते इस्लामी होकर भी अमेरिकापरस्त थे, पर भारत में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के बाद भी जो पाकिस्तान नहीं सुधरा था, उसने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने एवं भारत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद अपना सुर बदलना शुरू कर दिया है। हालांकि, सुर तो चीन के भी बदले हैं। चीनी मीडिया जहां भाजपा की इस जीत व पीएम मोदी की लोकप्रियता को भारत के स्वाभिमान से जोड़कर देख रहा है, वहीं कट्टर मजहबी उन्माद रखने वाला पाकिस्तान उससे भी एक कदम आगे बढ़ ‘सर्वधर्म समभाव’ की बात करता दिख रहा है। कम से कम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा कराची में रिकॉर्ड हुआ वीडियो तो यही बता रहा है। पाक से अब तक अल्पसंख्यकों को सताए जाने, मंदिरों को तोड़ने, हिंदुओं के पलायन और उन पर होने वाले अत्याचारों से जुड़ी खबरें ही आती रही हैं, लेकिन अचानक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा हिंदू परंपराओं और त्यौहारों को सम्मान दिए जाने की खबर ने सबको चौंका दिया है। उन्होंने न केवल होली के मौके पर हिंदू समुदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर अतिथि शिरकत की, बल्कि एक युवती ने जब गायत्री मंत्र गाया, तो न सिर्फ उसे सुना, बल्कि तालियां बजाकर उसका हौसला भी बढ़ाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाज शरीफ ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘हैप्पी होली’ से की व कहा कि वे किसी धर्म विशेष के नहीं, बल्कि सबके पीएम हैं। सबकी सेवा उनका फर्ज है। हिंदू समुदाय के लोगों के लिए होली पर दिए गए अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि जबरन धर्मातरण व दूसरे धर्म के पूजा स्थलों को क्षति पहुंचाना इस्लाम और पाकिस्तान में अपराध है। यह किसी का काम नहीं कि वह फैसला करे कि कौन व्यक्ति जन्नत जाएगा और कौन जहन्नुम। हां, हमें पाक को जन्नत जरूर बनाना है। पीएम नवाज शरीफ ने यह भी कहा, कुछ लोग पगड़ी पहनते हैं, तो कुछ चोंगा धारण करते हैं, कुछ सूट व टाई पहनना पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग सलवार कमीज पहनते हैं। लेकिन ये सभी अल्लाह के बंदे हैं। मजहब की आजादी ऊपर वाले ने सभी को दी है, हम इसे छीनने वाले कोई नहीं होते। पाकिस्तान के बारे में एक बात काफी मशहूर है कि वह अपनी गलतियों और अपराधों को छिपाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान में हिंदू व ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार ही नहीं होता, उन्हें बेवजह परेशान भी किया जाता है और वहां की सरकार मूक दर्शक बनकर तमाशा देखती रहती है। पीएम नवाज शरीफ के सामने गायत्री मंत्र का जाप कूटनीतिक प्रचार या पीआर एक्सरसाइज भी हो सकती है। पर क्या इतने भर से पाकिस्तान पर भरोसा किया जा सकता है? वर्ष-1947 में जब पाकिस्तान अपने वजूद में आया था, उस समय पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की कुल आबादी का 15 फीसदी थी। साल 1998 तक यह आंकड़ा सिर्फ 1.6 फीसदी ही रह गया था। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, आजादी के बाद से पाकिस्तान में बसे 90 प्रतिशत हिंदू देश छोड़ चुके हैं। वे पलायन कर विदेश चले गए और कुछ भारत में रह रहे अपने रिश्तेदारों के पास आ गए। यहीं नहीं, अब वहां उनके पूजा स्थल व मंदिर भी तेजी से गायब हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में मौजूद 336 सदस्यों में हिंदुओं की संख्या मात्र सात है। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट कहती है कि वहां हर महीने 20 से 25 हिंदू लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जाता है। वहां के अखबार द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक साल एक हजार से भी ज्यादा हिंदू और क्रिश्चियन लड़कियों का अपहरण किया जाता है। पाक के धार्मिक अल्पसंख्यकों को सदा यह शिकायत रहती है कि उनके धर्म स्थलों को पाक सरकार की तरफ से सुरक्षा नहीं दी जाती। प्यू रिसर्च के 2014 के सर्वे के मुताबिक, वहां के 57 फीसदी लोग धार्मिक भेदभाव को देश की सबसे बड़ी व गंभीर समस्या मानते हैं।
हालांकि, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भरी महफिल में शराफत वाली बातें कहकर देश और दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि उनसे ज्यादा शरीफ तो कोई नहीं है। कारगिल युद्ध और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान भी इनकी कारगुजारी कम नहीं थी। दुनिया ने देखा था कि अटलजी तो पड़ौसी देश का धर्म निभाते हुए बस लेकर वहां गए, लेकिन उसने हमारी सद्भावना को हमारी गंभीर कमजोरी समझा। पाकिस्तान की नीयत कभी सुधर नहीं सकती है। घाटी में आतंकियों की घुसपैठ में उसका हाथ होने के कई प्रमाण मौजूद हैं, जिसके कारण उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके पाक में गायत्री मंत्र का सार्वजनिक रूप से गायन हो जाना और वहां के पीएम का ताली बजाना एक बड़ी घटना है। यह बात भी सच है कि अभी तक वहां कट्टरपंथियों या वहां की अदालत ने गायत्री मंत्र का जाप करने वाली उस लड़की के खिलाफ न तो कोई फतवा जारी किया है और न ही किसी मौलाना ने उस लड़की के साथ ही प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का सिर कलम करने के एवज में किसी बड़े इनाम की घोषणा की है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन के संस्थापक शलभ कुमार कहते हैं कि शायद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने देश का विकास भारत जैसा करने के साथ ही साथ आतंकवाद से भी छुटकारा चाहते हैं। उनका कहना है कि नवाज शरीफ पाकिस्तान को सही दिशा में ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, मैं यह पक्के तौर पर नहीं कह सकता, लेकिन ऐसा लगता है कि अगर मामला बस उन्हीं का रहे तो वे आतंकवाद से छुटकारा पा भी लें। हालांकि, आईएसआई व सेना उन्हें यह करने नहीं देगी। उनका बयान अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य टेड पोई द्वारा प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए विधेयक के बाद आया है, जिसके पारित हो जाने पर ट्रंप प्रशासन की मजबूरी हो जाएगी कि वह पाकिस्तान को आतंकवाद का वित्त-पोषण करने वाला देश घोषित कर दे। अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो उसे स्पष्टीकरण देना होगा। जाहिर है, नवाज शरीफ पर उदार होने का दबाव पड़ौस से कम, सात समंदर पार से ज्यादा पड़ रहा है।
जयप्रकाश पांडेय (अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार) 
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