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संपादकीय

अपनी गिरेबां में नहीं झांकते वे

By Raj Express | Publish Date: 3/21/2017 11:12:44 AM
अपनी गिरेबां में नहीं झांकते वे
योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अमेरिकी और पाकिस्तानी मीडिया में जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उन्हें देख-सुनकर यही मुहावरा याद आता है कि सूप तो सूप, छलनी भी बोले, जिसमें लाखों छेद..। इस मुहावरे का मतलब यह है कि उन लोगों को दूसरों की तरफ उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं होता, जो स्वयं गलत हों। पाकिस्तानी मीडिया अपनी गिरेबां में नहीं झांकता, न ही यह काम अमेरिकी मीडिया भी कर रहा है, जबकि दोनों इस चिंता में दुबले हुए जा रहे हैं कि अब योगी मुख्यमंत्री बन चुके हैं, तो भारत की धर्मनिरपेक्षता का क्या होगा? ये हमें लेकर चिंतित न हों, क्योंकि हमारे समाज का तो मिजाज ही धर्मनिरपेक्ष है। वरना, जब अगस्त-1947 में भारत का विभाजन हुआ था, तो जिस प्रकार हमारा एक अंग एक धर्म विशेष का देश बन गया था, वैसे ही हम अपने धर्म के देश बन जाते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमने धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को न केवल स्वीकार किया, सभ्य दुनिया के साथ कदमताल करते हुए इसे अपना संवैधानिक मूल्य भी बनाया। यही मूल्य भारत की पहचान बन चुका है। दूसरी ओर, अमेरिका में आजकल क्या हो रहा है? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और न्यायपालिका में छह मुस्लिम देशों के नागरिकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाने और उसे खारिज करने की एक होड़ चल पड़ी है। ट्रंप प्रतिबंध लगाते हैं, जबकि न्यायपालिका उन्हें खारिज कर देती है। तथ्य यह भी है कि वहां धर्म, रंग और क्षेत्र आधारित घृणा बढ़ी है और इसीलिए अल्पसंख्यक समुदाय स्वयं को असुरक्षित मानने लगे हैं। यह तो हुई वर्तमान की बात और यदि हम अमेरिका के इतिहास में झांकें तो साफ हो जाएगा कि अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे देशों पर इसने कैसे-कैसे जुल्म ढाए हैं व जिन लोगों पर जुल्म किए गए, वे ज्यादातर मुसलमान ही थे। याद नहीं आता कि अमेरिकी मीडिया ने कभी इराक पर अमेरिका के हमले को गलत बताया या सीरिया में गृह युद्ध भड़काने के लिए अपनी सरकार की निंदा की, पर वह भारत को लेकर चिंतित है। पाकिस्तान की कहानी तो अमेरिका से भी ज्यादा विचित्र है। वहां ईसाई, हिंदू व सिख जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक तो दोयम दर्जे के नागरिक माने ही जाते हैं, मुस्लिमों के अन्य धड़े-शिया, अहमदिया, खोजा आदि भी दोयम ही माने जाते हैं। सच यह भी है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की तादाद तेजी से घट रही है और इसका कारण यह है कि या तो उनका धर्मातरण कर दिया गया है या फिर उन्हें पाकिस्तान से खदेड़ दिया गया है। योगी के मुख्यमंत्री बनने पर चीख-पुकार मचाने वाले पाकिस्तान के समाचार चैनल बताएं कि वे अपने देश के अल्पसंख्यकों की आवाज कब बनेंगे? बेहतर यही हो कि ये दोनों देश और इनका मीडिया अपने-अपने भीतर झांके। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां के संविधान में इतनी ताकत है कि जो ऊंचे पद पर पहुंचता है, वह उसकी अवहेलना नहीं कर पाता। फिर भी कुछ गलत होगा, तो हम अपनी चिंता कर लेंगे। अमेरिका व पाकिस्तान भी अपनी ही चिंता करें।
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